📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
शिक्षा
बिहार के शिक्षा मंत्री ने आरक्षण से संपन्न परिवारों के बच्चों को बाहर रखने की बात कही
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 31 अग. 2026, 12:03 PM
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शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सामाजिक‑आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के बच्चों को बिहार में आरक्षण से बाहर रखने पर विचार किया जाना चाहिए।
पटना, बिहार – आरक्षण नीति पर चल रहे राजनीतिक बहस के बीच, राज्य शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सामाजिक‑आर्थिक रूप से पहले ही समृद्ध परिवारों के बच्चों को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि आरक्षण का मूल उद्देश्य, जो पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाना है, वह तभी प्रभावी रहेगा जब यह सुविधा केवल जरूरतमंद वर्गों तक सीमित रहे।
तिवारी ने यह बात एक प्रेस इंटरव्यू में कही, जहाँ उन्होंने पात्रता मानदंड को कड़ा करने और सबसे अधिक जरूरतमंद वर्गों को ही समर्थन प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसी विशेष आंकड़े या समय‑सीमा का उल्लेख नहीं किया, पर यह संकेत दिया कि यह मुद्दा राज्य सरकार के एजेंडे में शामिल होगा।
यह टिप्पणी बिहार में आरक्षण सुधारों के चल रहे विमर्श में एक नया आयाम जोड़ती है, जहाँ विपक्षी दल और सामाजिक समूह आरक्षण को विस्तारित या सीमित करने दोनों ही पक्ष में आवाज़ उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नीति में कोई भी बदलाव राज्य के शैक्षणिक क्षेत्र और कॉलेज प्रवेश के जनसांख्यिकीय संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।
मुख्य मंत्री कार्यालय या राज्य आरक्षण समिति से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। प्रस्ताव को आगामी मंत्रिपरिषद में चर्चा के लिए रखा गया है।
तिवारी ने यह बात एक प्रेस इंटरव्यू में कही, जहाँ उन्होंने पात्रता मानदंड को कड़ा करने और सबसे अधिक जरूरतमंद वर्गों को ही समर्थन प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसी विशेष आंकड़े या समय‑सीमा का उल्लेख नहीं किया, पर यह संकेत दिया कि यह मुद्दा राज्य सरकार के एजेंडे में शामिल होगा।
यह टिप्पणी बिहार में आरक्षण सुधारों के चल रहे विमर्श में एक नया आयाम जोड़ती है, जहाँ विपक्षी दल और सामाजिक समूह आरक्षण को विस्तारित या सीमित करने दोनों ही पक्ष में आवाज़ उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नीति में कोई भी बदलाव राज्य के शैक्षणिक क्षेत्र और कॉलेज प्रवेश के जनसांख्यिकीय संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।
मुख्य मंत्री कार्यालय या राज्य आरक्षण समिति से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। प्रस्ताव को आगामी मंत्रिपरिषद में चर्चा के लिए रखा गया है।