📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash.dwivedi
राजनीति
भोपाल मास्टर प्लान विवाद: कांग्रेस ने लगाया भाजपा पर निशाना, नेता ने शुरू किया 31 घंटे का उपवास
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 11 सित. 2026, 03:33 PM
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कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भोपाल मास्टर प्लान को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि प्लान न होने से व्यापारी दलालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पीसी शर्मा ने विरोध में 31 घंटे का उपवास शुरू किया है।
भोपाल में शहर के मास्टर प्लान को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने सरकार पर तीखी आलोचना की है और दावा किया है कि प्लान के अंतिम रूप न आने से प्रशासनिक बाधाएं बढ़ रही हैं।
सिंह ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान के न होने के कारण व्यापारी और कारोबारी अपनी अनुमतियों के लिए नेताओं और दलालों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अव्यवस्था से स्थानीय उद्यमियों की वैध व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और अनावश्यक प्रक्रियाएं बनाई जा रही हैं।
प्रदर्शन के रूप में पीसी शर्मा ने इस मुद्दे को उभारने के लिए 31 घंटे का उपवास शुरू किया है। विपक्षी दल का कहना है कि वर्तमान स्थिति शहरी योजना प्रक्रियों में पारदर्शिता और दक्षता की कमी को दर्शाती है।
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को जनहित का मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियां नियमित विकास के बजाय अव्यवस्था को बढ़ावा दे रही हैं। यह उपवास भोपाल में भूमि और भवन अनुमति प्रक्रियों में alleged अनियमितताओं पर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक प्रतीकात्मक कदम है।
सिंह ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान के न होने के कारण व्यापारी और कारोबारी अपनी अनुमतियों के लिए नेताओं और दलालों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अव्यवस्था से स्थानीय उद्यमियों की वैध व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और अनावश्यक प्रक्रियाएं बनाई जा रही हैं।
प्रदर्शन के रूप में पीसी शर्मा ने इस मुद्दे को उभारने के लिए 31 घंटे का उपवास शुरू किया है। विपक्षी दल का कहना है कि वर्तमान स्थिति शहरी योजना प्रक्रियों में पारदर्शिता और दक्षता की कमी को दर्शाती है।
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को जनहित का मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियां नियमित विकास के बजाय अव्यवस्था को बढ़ावा दे रही हैं। यह उपवास भोपाल में भूमि और भवन अनुमति प्रक्रियों में alleged अनियमितताओं पर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक प्रतीकात्मक कदम है।