Jobs & Career
भागलपुर कि बेटी वंशिका बनी ने भरी कामयाबी कि उड़ान
भागलपुर कि बेटी वंशिका 20 साल कि उम्र में बनी इंडिगो कैडेट पायलट प्रोग्राम का हिस्सा
भागलपुर से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
भागलपुर की बेटी वंशिका ने भरी कामयाबी की उड़ान, 20 सालकिउम्र कीपायलट बनीं इंडिगो कैडेट पायलट प्रोग्राम का हिस्सा, ट्रेनिंग के लिए जाएंगी फिलीपीं आसमान में उड़ान भरने का सपना देखने वालों की कमी नहीं, लेकिन अपने सपनों को हकीकत में बदलने का जज्बा हर किसी में नहीं होता। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है भागलपुर की बेटी वंशिका विराज ने। घोघा के रहने वाले विश्वजीत सिंह की 20 वर्षीय बेटी वंशिका ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर इंडिगो एयरलाइंस के प्रतिष्ठित कैडेट पायलट प्रोग्राम में जगह बनाई है। खास बात यह है कि चयन के अंतिम चरण में बिहार से चुनी गईं वंशिका इकलौती अभ्यर्थी हैं। अब अपने पायलट बनने के सपने को पूरा करने के लिए वह फिलीपींस में उड़ान की ट्रेनिंग लेंगी।
वंशिका की इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, लगन और संघर्ष की कहानी छिपी है। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने केरल के तिरुवनंतपुरम से एविएशन की पढ़ाई शुरू की। यहां डीजीसीए के निर्धारित पाठ्यक्रम के तहत विमानन और फ्लाइट ट्रेनिंग की बारीकियां सीखीं। इसके बाद इंडिगो के कैडेट पायलट प्रोग्राम के लिए आवेदन किया। चयन प्रक्रिया भी आसान नहीं थी। एप्टीट्यूड टेस्ट, इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन और मेडिकल जांच समेत कुल पांच चरणों से गुजरने के बाद उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। अंतिम चयन में कुल 10 अभ्यर्थियों को जगह मिली, जिसमें भागलपुर की वंशिका भी शामिल रहीं।
अब वंशिका के सपनों को पंख देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। अगले चरण में उन्हें फिलीपींस भेजा जाएगा, जहां करीब 200 घंटे की फ्लाइट ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान विमान उड़ाने के व्यावहारिक अनुभव के साथ विमान संचालन और तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी मिलेगी। फिलीपींस में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह भारत लौटेंगी और यहां आगे की निर्धारित ट्रेनिंग पूरी करेंगी। इसके बाद उनका कमर्शियल पायलट बनने का सपना साकार होने की दिशा में बड़ा कदम पूरा होगा।
हालांकि, वंशिका के लिए यह सफर केवल पढ़ाई और परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने संघर्ष के अनुभव भी साझा किए। उनका कहना है कि दिल्ली में बिहारी होने के कारण कई बार ऐसी बातें सुननी पड़ीं, जिनसे उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश हुई। लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। आलोचनाओं का जवाब बहस से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और कामयाबी से देने का फैसला किया। आखिरकार आज उनकी उपलब्धि खुद उनकी काबिलियत की गवाही दे रही है।
इधर, बेटी की इस कामयाबी से परिवार में खुशी की लहर है। माता-पिता अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। परिवार के मुताबिक वंशिका बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। पिता की इच्छा थी कि बेटी डॉक्टर बने, लेकिन वंशिका ने आसमान में उड़ान भरने का सपना चुना। परिवार ने भी उनके फैसले का साथ दिया और आज बेटी ने अपने जुनून से पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
भागलपुर के छोटे से कस्बे घोघा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पायलट ट्रेनिंग तक का सफर तय करने वाली वंशिका विराज की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं, लेकिन परिस्थितियों और चुनौतियों के आगे कभी-कभी हिम्मत हारने लगते हैं। वंशिका ने साबित कर दिया है कि सपनों की ऊंचाई आपके शहर या आपकी पहचान से तय नहीं होती, बल्कि उन्हें पूरा करने का हौसला और मेहनत ही आपकी मंजिल तय करती है।
भागलपुर की इस बेटी ने फिलहाल सफलता की पहली बड़ी उड़ान भर दी है, अब इंतजार उस दिन का है जब वंशिका विराज कॉकपिट में बैठकर आसमान की ऊंचाइयों को छुएंगी।
भागलपुर की बेटी वंशिका ने भरी कामयाबी की उड़ान, 20 सालकिउम्र कीपायलट बनीं इंडिगो कैडेट पायलट प्रोग्राम का हिस्सा, ट्रेनिंग के लिए जाएंगी फिलीपीं आसमान में उड़ान भरने का सपना देखने वालों की कमी नहीं, लेकिन अपने सपनों को हकीकत में बदलने का जज्बा हर किसी में नहीं होता। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है भागलपुर की बेटी वंशिका विराज ने। घोघा के रहने वाले विश्वजीत सिंह की 20 वर्षीय बेटी वंशिका ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर इंडिगो एयरलाइंस के प्रतिष्ठित कैडेट पायलट प्रोग्राम में जगह बनाई है। खास बात यह है कि चयन के अंतिम चरण में बिहार से चुनी गईं वंशिका इकलौती अभ्यर्थी हैं। अब अपने पायलट बनने के सपने को पूरा करने के लिए वह फिलीपींस में उड़ान की ट्रेनिंग लेंगी।
वंशिका की इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, लगन और संघर्ष की कहानी छिपी है। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने केरल के तिरुवनंतपुरम से एविएशन की पढ़ाई शुरू की। यहां डीजीसीए के निर्धारित पाठ्यक्रम के तहत विमानन और फ्लाइट ट्रेनिंग की बारीकियां सीखीं। इसके बाद इंडिगो के कैडेट पायलट प्रोग्राम के लिए आवेदन किया। चयन प्रक्रिया भी आसान नहीं थी। एप्टीट्यूड टेस्ट, इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन और मेडिकल जांच समेत कुल पांच चरणों से गुजरने के बाद उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। अंतिम चयन में कुल 10 अभ्यर्थियों को जगह मिली, जिसमें भागलपुर की वंशिका भी शामिल रहीं।
अब वंशिका के सपनों को पंख देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। अगले चरण में उन्हें फिलीपींस भेजा जाएगा, जहां करीब 200 घंटे की फ्लाइट ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान विमान उड़ाने के व्यावहारिक अनुभव के साथ विमान संचालन और तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी मिलेगी। फिलीपींस में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह भारत लौटेंगी और यहां आगे की निर्धारित ट्रेनिंग पूरी करेंगी। इसके बाद उनका कमर्शियल पायलट बनने का सपना साकार होने की दिशा में बड़ा कदम पूरा होगा।
हालांकि, वंशिका के लिए यह सफर केवल पढ़ाई और परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने संघर्ष के अनुभव भी साझा किए। उनका कहना है कि दिल्ली में बिहारी होने के कारण कई बार ऐसी बातें सुननी पड़ीं, जिनसे उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश हुई। लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। आलोचनाओं का जवाब बहस से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और कामयाबी से देने का फैसला किया। आखिरकार आज उनकी उपलब्धि खुद उनकी काबिलियत की गवाही दे रही है।
इधर, बेटी की इस कामयाबी से परिवार में खुशी की लहर है। माता-पिता अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। परिवार के मुताबिक वंशिका बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। पिता की इच्छा थी कि बेटी डॉक्टर बने, लेकिन वंशिका ने आसमान में उड़ान भरने का सपना चुना। परिवार ने भी उनके फैसले का साथ दिया और आज बेटी ने अपने जुनून से पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
भागलपुर के छोटे से कस्बे घोघा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पायलट ट्रेनिंग तक का सफर तय करने वाली वंशिका विराज की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं, लेकिन परिस्थितियों और चुनौतियों के आगे कभी-कभी हिम्मत हारने लगते हैं। वंशिका ने साबित कर दिया है कि सपनों की ऊंचाई आपके शहर या आपकी पहचान से तय नहीं होती, बल्कि उन्हें पूरा करने का हौसला और मेहनत ही आपकी मंजिल तय करती है।
भागलपुर की इस बेटी ने फिलहाल सफलता की पहली बड़ी उड़ान भर दी है, अब इंतजार उस दिन का है जब वंशिका विराज कॉकपिट में बैठकर आसमान की ऊंचाइयों को छुएंगी।