बगड़ तिराया के पास जंगल में बंधे मिले तीन गोवंश, गोरक्षक दल और पुलिस ने कराया मुक्त
बगड़ तिराया के पास जंगल में बंधे मिले तीन गोवंश, गोरक्षक दल और पुलिस ने कराया मुक्त
प्राथमिक उपचार के बाद सुधा सागर गोशाला पहुंचाया
रामगढ़ क्षेत्र के बगड़ तिराया थाना अंतर्गत अलवर-दिल्ली हाईवे स्थित एक ईंट भट्टे के पीछे जंगल में बंधे मिले तीन गोवंशों को गोरक्षक दल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मुक्त कराया गया। तीनों गोवंशों को रस्सियों से बांधकर रखा गया था। बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार कराया गया और बगड़ तिराया स्थित सुधा सागर गोशाला पहुंचाया गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
रविवार को दोपहर बारह बजे गोरक्षक दल के सदस्य यतिन दत्त ने बताया कि देर रात करीब एक बजे सूचना मिली कि बगड़ तिराया थाना क्षेत्र में ईंट भट्टे के पीछे जंगल में तीन नंदियों को गोतस्करी के उद्देश्य से ले जाने की आशंका है। सूचना मिलते ही गोरक्षक दल के सदस्य मौके पर पहुंचे और पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद थाने से एएसआई सूजन सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर तीनों गोवंश रस्सियों से बंधे मिले। गोरक्षक दल और पुलिस ने संयुक्त रूप से उन्हें मुक्त कराया।
गोवंशों की स्थिति को देखते हुए उनका प्राथमिक उपचार कराया गया। इसके बाद तीनों को सुरक्षित सुधा सागर गोशाला पहुंचाया गया, जहां उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई।
प्राथमिक उपचार के बाद सुधा सागर गोशाला पहुंचाया
रामगढ़ क्षेत्र के बगड़ तिराया थाना अंतर्गत अलवर-दिल्ली हाईवे स्थित एक ईंट भट्टे के पीछे जंगल में बंधे मिले तीन गोवंशों को गोरक्षक दल और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मुक्त कराया गया। तीनों गोवंशों को रस्सियों से बांधकर रखा गया था। बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार कराया गया और बगड़ तिराया स्थित सुधा सागर गोशाला पहुंचाया गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
रविवार को दोपहर बारह बजे गोरक्षक दल के सदस्य यतिन दत्त ने बताया कि देर रात करीब एक बजे सूचना मिली कि बगड़ तिराया थाना क्षेत्र में ईंट भट्टे के पीछे जंगल में तीन नंदियों को गोतस्करी के उद्देश्य से ले जाने की आशंका है। सूचना मिलते ही गोरक्षक दल के सदस्य मौके पर पहुंचे और पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद थाने से एएसआई सूजन सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर तीनों गोवंश रस्सियों से बंधे मिले। गोरक्षक दल और पुलिस ने संयुक्त रूप से उन्हें मुक्त कराया।
गोवंशों की स्थिति को देखते हुए उनका प्राथमिक उपचार कराया गया। इसके बाद तीनों को सुरक्षित सुधा सागर गोशाला पहुंचाया गया, जहां उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई।