📷 चित्र स्रोत: TOI City (via NewsData)
स्थानीय
बेंगलुरु में 1864 में पहली ट्रेन की सीटी, क़ान्टोनेमेंट से जोलरपेटी तक
✍️ TOI City
🗓 12 सित. 2026, 01:44 PM
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1864 में बेंगलुरु ने पहली बार भाप इंजन की सीटी सुनी, जब बंगलौर मेल क़ान्टोनेमेंट से जोलरपेटी तक 149 किमी की पटरियों पर चला।
पहली भाप इंजन 1864 में बेंगलुरु पहुँची, जब बंगलौर मेल क़ान्टोनेमेंट से जोलरपेटी तक 149 किमी की पटरियों पर सेवा शुरू हुई। माद्रास रेलवे कंपनी ने इस सेवा का संचालन किया, और ट्रेन की सीटी शहर की पहली रेल यात्रा की ध्वनि थी।
नई पटरियों ने बेंगलुरु को ब्रिटिश भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा, जिससे यात्रियों और माल के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग खुला। इसने शहर को दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों के साथ तेज संचार और व्यापार का अवसर भी दिया।
शुरुआती दौर में, रेलवे को सैन्य जरूरतों के लिए बनाया गया था, जिससे क़ान्टोनेमेंट और रणनीतिक स्थानों के बीच सैनिकों और आपूर्ति को जल्दी से स्थानांतरित किया जा सके। इस पटरियों ने उपनिवेशी प्रशासन को क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद की।
समय के साथ, रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, जिससे बेंगलुरु अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ गया और दक्षिण भारत के बढ़ते रेल ढाँचे में समाहित हुआ।
नई पटरियों ने बेंगलुरु को ब्रिटिश भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा, जिससे यात्रियों और माल के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग खुला। इसने शहर को दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों के साथ तेज संचार और व्यापार का अवसर भी दिया।
शुरुआती दौर में, रेलवे को सैन्य जरूरतों के लिए बनाया गया था, जिससे क़ान्टोनेमेंट और रणनीतिक स्थानों के बीच सैनिकों और आपूर्ति को जल्दी से स्थानांतरित किया जा सके। इस पटरियों ने उपनिवेशी प्रशासन को क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद की।
समय के साथ, रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, जिससे बेंगलुरु अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ गया और दक्षिण भारत के बढ़ते रेल ढाँचे में समाहित हुआ।