📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gpkp
राजनीति
बेंगलुरु ट्रिब्यूनल में मतदाता सूची त्रुटियों की सुनवाई शुरू
✍️ India Today
🗓 08 अक्टू. 2026, 03:17 PM
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बेंगलुरु ट्रिब्यूनल ने मतदाता सूची में पाए गए SIR पंक्ति त्रुटियों को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई शुरू की, जिससे कर्नाटक में चिंता बढ़ी।
कर्नाटक हाई कोर्ट के बेंगलुरु ट्रिब्यूनल ने सोमवार को मतदाता सूची में संभावित त्रुटियों को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई शुरू की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि SIR (सीरियल आइडेंटिफिकेशन रजिस्टर) पंक्तियों में असंगतियां हैं, जो हजारों मतदाताओं की पात्रता को प्रभावित कर सकती हैं।
पेटिशनरों के कानूनी प्रतिनिधियों ने कुछ नमूना प्रविष्टियों को प्रस्तुत किया, जिसमें पंजीकृत पते और वास्तविक निवास स्थान में अंतर दिखाया गया। ट्रिब्यूनल ने भारत निर्वाचन आयोग को मतदाता डेटाबेस का विस्तृत ऑडिट प्रस्तुत करने और SIR पंक्तियों को अपडेट करने की कार्यविधि स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
सीनियर जजों के समन्वित पैनल ने कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता आगामी चुनावों पर असर डाल सकती है और आयोग को दो हफ्तों के भीतर जवाब देने का आदेश दिया। सुनवाई अगले कुछ हफ्तों तक जारी रहेगी, जब अधिक साक्ष्य की समीक्षा होगी।
निर्वाचन अधिकारियों ने सहयोग की इच्छा जताई है, यह बताते हुए कि समय-समय पर डेटा सत्यापन चुनावी रखरखाव का हिस्सा है। फिर भी उन्होंने सार्वजनिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए गहन जांच की आवश्यकता को स्वीकार किया।
राजनीतिक दलों और नागरिक समाज समूहों सहित सभी हितधारक इस प्रक्रिया को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि इसका परिणाम अगले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता पंजीकरण सुधारों को प्रभावित कर सकता है।
पेटिशनरों के कानूनी प्रतिनिधियों ने कुछ नमूना प्रविष्टियों को प्रस्तुत किया, जिसमें पंजीकृत पते और वास्तविक निवास स्थान में अंतर दिखाया गया। ट्रिब्यूनल ने भारत निर्वाचन आयोग को मतदाता डेटाबेस का विस्तृत ऑडिट प्रस्तुत करने और SIR पंक्तियों को अपडेट करने की कार्यविधि स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
सीनियर जजों के समन्वित पैनल ने कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता आगामी चुनावों पर असर डाल सकती है और आयोग को दो हफ्तों के भीतर जवाब देने का आदेश दिया। सुनवाई अगले कुछ हफ्तों तक जारी रहेगी, जब अधिक साक्ष्य की समीक्षा होगी।
निर्वाचन अधिकारियों ने सहयोग की इच्छा जताई है, यह बताते हुए कि समय-समय पर डेटा सत्यापन चुनावी रखरखाव का हिस्सा है। फिर भी उन्होंने सार्वजनिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए गहन जांच की आवश्यकता को स्वीकार किया।
राजनीतिक दलों और नागरिक समाज समूहों सहित सभी हितधारक इस प्रक्रिया को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि इसका परिणाम अगले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता पंजीकरण सुधारों को प्रभावित कर सकता है।