📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
अपराध
बेंगलुरु कोर्ट ने आरएसएस मानहानि केस में प्रियंक खड़गे और नालापड़ को जमानत दी
✍️ India Today
🗓 29 अग. 2026, 11:18 PM
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बेंगलुरु के एक न्यायालय ने आरएसएस द्वारा दायर मानहानि केस में प्रियंक खड़गे और नालापड़ को जमानत दे दी है।
बेंगलुरु के न्यायालय ने आरएसएस द्वारा दायर मानहानि मामले में प्रियंक खड़गे और नालापड़ को जमानत दे दी है। दोनों को कथित ऐसे बयानों के लिए हिरासत में रखा गया था, जिन्हें आरएसएस ने मानहानिक माना था।
जमानत का आदेश तब दिया गया जब अदालत ने अभियुक्तों द्वारा दायर याचिका पर विचार किया, जिसमें उन्होंने आरोपों को निराधार बताया और जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई। जज ने मानहानि के कानूनी पहलुओं और जमानत की शर्तों को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
इस निर्णय से खड़गे और नालापड़ को मुकदमे के चलने तक स्वतंत्र रहने की अनुमति मिलती है। आदेश में आरोपित बयानों या अगली सुनवाई की तिथि के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक या वैचारिक संगठनों के खिलाफ मानहानि के मामले अक्सर सार्वजनिक ध्यान आकर्षित करते हैं, पर न्यायालय का मुख्य उद्देश्य प्रक्रिया की निष्पक्षता और शिकायतकर्ता तथा अभियुक्त दोनों के अधिकारों का संतुलन बनाना रहता है।
जमानत का मतलब बरी होना नहीं है; अभियुक्तों को आरएसएस की शिकायत के तथ्यों पर आगे की सुनवाई का सामना करना पड़ेगा।
जमानत का आदेश तब दिया गया जब अदालत ने अभियुक्तों द्वारा दायर याचिका पर विचार किया, जिसमें उन्होंने आरोपों को निराधार बताया और जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई। जज ने मानहानि के कानूनी पहलुओं और जमानत की शर्तों को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
इस निर्णय से खड़गे और नालापड़ को मुकदमे के चलने तक स्वतंत्र रहने की अनुमति मिलती है। आदेश में आरोपित बयानों या अगली सुनवाई की तिथि के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक या वैचारिक संगठनों के खिलाफ मानहानि के मामले अक्सर सार्वजनिक ध्यान आकर्षित करते हैं, पर न्यायालय का मुख्य उद्देश्य प्रक्रिया की निष्पक्षता और शिकायतकर्ता तथा अभियुक्त दोनों के अधिकारों का संतुलन बनाना रहता है।
जमानत का मतलब बरी होना नहीं है; अभियुक्तों को आरएसएस की शिकायत के तथ्यों पर आगे की सुनवाई का सामना करना पड़ेगा।