📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Themastaadmi
स्वास्थ्य
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की स्वास्थ्य संकट: एनजीओ रिपोर्ट में 196 मामले, प्रणाली में खामियां
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 19 सित. 2026, 03:01 PM
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बालाघाट जिले की एक नई एनजीओ रिपोर्ट में 10 साल से कम उम्र के 196 बैगा बच्चों के रोग मामलों को उजागर किया गया, जिसमें डेटा सिस्टम और प्रयोगशाला सुविधाओं की कमी बताई गई है।
एक स्वतंत्र एनजीओ ने बालाघाट जिले में बैगा आदिवासी बच्चों में 196 रोग मामलों का दस्तावेज़ तैयार किया है, जिसमें से 156 बच्चे दस साल से कम उम्र के हैं। ये मामले पिछले एक साल में रोग के बढ़ते प्रकोप और कई बाल मृत्यु के बाद दर्ज किए गए थे।
रिपोर्ट स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर कमियों की ओर इशारा करती है। जिला स्तर पर कोई एकीकृत स्वास्थ्य‑सूचना प्रणाली नहीं है, जिससे मामलों का ट्रैक रखना, संसाधन आवंटित करना या परिणामों की निगरानी करना कठिन हो रहा है। साथ ही, प्रयोगशाला सुविधाओं की अनुपस्थिति के कारण निदान अक्सर देर से या केवल क्लिनिकल जाँच पर निर्भर रहता है।
इन प्रणालीगत खामियों ने आदिवासी जनसंख्या को अधिक असुरक्षित बना दिया है, रिपोर्ट में कहा गया है। दस्तावेज़ तुरंत एक डिजिटल डेटा प्लेटफ़ॉर्म की स्थापना और पूरी तरह सुसज्जित प्रयोगशाला की तैनाती की मांग करता है, ताकि समय पर परीक्षण और उपचार संभव हो सके।
स्वास्थ्य अधिकारियों से इन उपायों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है, क्योंकि मौजूदा अंतर न केवल बाल स्वास्थ्य बल्कि जिले के व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को भी खतरे में डाल रहा है।
रिपोर्ट स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर कमियों की ओर इशारा करती है। जिला स्तर पर कोई एकीकृत स्वास्थ्य‑सूचना प्रणाली नहीं है, जिससे मामलों का ट्रैक रखना, संसाधन आवंटित करना या परिणामों की निगरानी करना कठिन हो रहा है। साथ ही, प्रयोगशाला सुविधाओं की अनुपस्थिति के कारण निदान अक्सर देर से या केवल क्लिनिकल जाँच पर निर्भर रहता है।
इन प्रणालीगत खामियों ने आदिवासी जनसंख्या को अधिक असुरक्षित बना दिया है, रिपोर्ट में कहा गया है। दस्तावेज़ तुरंत एक डिजिटल डेटा प्लेटफ़ॉर्म की स्थापना और पूरी तरह सुसज्जित प्रयोगशाला की तैनाती की मांग करता है, ताकि समय पर परीक्षण और उपचार संभव हो सके।
स्वास्थ्य अधिकारियों से इन उपायों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है, क्योंकि मौजूदा अंतर न केवल बाल स्वास्थ्य बल्कि जिले के व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को भी खतरे में डाल रहा है।