📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep Chakraborty
कृषि
असम का पहला आईवीएफ‑जन्मा बछड़ा लखिमी अब चराई पर
✍️ The Indian Express
🗓 25 अग. 2026, 06:51 PM
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असम के वैज्ञानिकों ने लखिमी नाम का पहला आईवीएफ‑जन्मा बछड़ा सफलतापूर्वक पैदा किया, अब उसे चराई के लिए फार्म में ले जाया गया है।
असम के एक कृषि अनुसंधान केंद्र की टीम ने लखिमी नाम का पहला आईवीएफ‑जन्मा बछड़ा सफलतापूर्वक जन्म दिया। यह भ्रूण प्रयोगशाला में पेट्री डिश में विकसित कर सरोगेट गाय में प्रत्यारोपित किया गया, जिससे भारतीय पशुपालन में सहायक प्रजनन तकनीक का एक नया चरण शुरू हुआ।
विज्ञानियों ने भ्रूण की निगरानी के बाद उसे सरोगेट में स्थापित किया और पूर्ण गर्भधारण के बाद स्वस्थ बछड़े को जन्म दिया। अब बछड़े को चराई वाले फार्म में ले जाया गया है जहाँ वह सामान्य पोषण पायेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से उच्च उत्पादन या रोग‑प्रतिरोधी नस्लों के प्रजनन में मदद मिल सकती है। नियंत्रित जीनोमिक्स के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने और पारंपरिक प्रजनन पर निर्भरता घटाने की संभावना है।
लखिमी को अब कुछ हफ्तों तक चराई के माहौल में अनुकूलित किया जाएगा, जबकि वैज्ञानिक उसकी वृद्धि और स्वास्थ्य पर नज़र रखेंगे, ताकि भविष्य में आईवीएफ तकनीक को अधिक व्यापक रूप से लागू किया जा सके।
विज्ञानियों ने भ्रूण की निगरानी के बाद उसे सरोगेट में स्थापित किया और पूर्ण गर्भधारण के बाद स्वस्थ बछड़े को जन्म दिया। अब बछड़े को चराई वाले फार्म में ले जाया गया है जहाँ वह सामान्य पोषण पायेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से उच्च उत्पादन या रोग‑प्रतिरोधी नस्लों के प्रजनन में मदद मिल सकती है। नियंत्रित जीनोमिक्स के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने और पारंपरिक प्रजनन पर निर्भरता घटाने की संभावना है।
लखिमी को अब कुछ हफ्तों तक चराई के माहौल में अनुकूलित किया जाएगा, जबकि वैज्ञानिक उसकी वृद्धि और स्वास्थ्य पर नज़र रखेंगे, ताकि भविष्य में आईवीएफ तकनीक को अधिक व्यापक रूप से लागू किया जा सके।