📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ggn77
स्वास्थ्य
हरियाणा में एंटी‑स्नेक वैनम ने इस साल 473 जानें बचाईं
✍️ timesofindia.indiatimes.com
🗓 20 सित. 2026, 06:15 AM
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राज्य स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि एंटी‑स्नेक वैनम ने 2024 में हरियाणा में 473 साप काटने के मामलों में जीवन बचाए हैं।
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस वर्ष एंटी‑स्नेक वैनम (एएसवी) का उपयोग 473 साप काटने के रोगियों पर किया गया, जिससे सभी को सफलतापूर्वक बचाया गया। यह आंकड़ा जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से संकलित किया गया है, जो राज्य में एएसवी की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास को दर्शाता है।
अधिकारियों ने कहा कि एएसवी की स्टॉक में वृद्धि और चिकित्सकों को समय पर दवा देने के प्रशिक्षण ने मृत्यु दर को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस साल की शुरुआत में विभाग ने दूरदराज़ क्षेत्रों में भी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वितरण अभियान शुरू किया।
विभाग ने जनता से साप काटने के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता लेने और पारंपरिक उपचार पर भरोसा न करने की अपील की, क्योंकि शीघ्र एएसवी उपचार ही सबसे प्रभावी जीवनरक्षक उपाय है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि जबकि साप काटने की संख्या स्थिर बनी हुई है, बेहतर प्रतिक्रिया तंत्र ने मृत्यु दर को काफी घटा दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और जन जागरूकता के निरंतर समर्थन की आवश्यकता स्पष्ट हुई है।
हरियाणा आगे भी एएसवी के उपयोग की निगरानी करेगा और समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रमों का विस्तार करेगा, ताकि भविष्य में साप काटने से होने वाली मौतों को और घटाया जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि एएसवी की स्टॉक में वृद्धि और चिकित्सकों को समय पर दवा देने के प्रशिक्षण ने मृत्यु दर को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस साल की शुरुआत में विभाग ने दूरदराज़ क्षेत्रों में भी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वितरण अभियान शुरू किया।
विभाग ने जनता से साप काटने के बाद तुरंत चिकित्सा सहायता लेने और पारंपरिक उपचार पर भरोसा न करने की अपील की, क्योंकि शीघ्र एएसवी उपचार ही सबसे प्रभावी जीवनरक्षक उपाय है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि जबकि साप काटने की संख्या स्थिर बनी हुई है, बेहतर प्रतिक्रिया तंत्र ने मृत्यु दर को काफी घटा दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और जन जागरूकता के निरंतर समर्थन की आवश्यकता स्पष्ट हुई है।
हरियाणा आगे भी एएसवी के उपयोग की निगरानी करेगा और समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रमों का विस्तार करेगा, ताकि भविष्य में साप काटने से होने वाली मौतों को और घटाया जा सके।