📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Arjunaraoc
टेक्नोलॉजी
आंध्र प्रदेश ने डेनिश फाइबर‑रिइन्फोर्स्ड सड़कों से पॉटहोल समस्या का समाधान
✍️ The Better India
🗓 15 सित. 2026, 03:32 AM
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आंध्र प्रदेश सरकार ने डेनिश फाइबर‑रिइन्फोर्स्ड सड़क सामग्री के परीक्षण शुरू किए हैं, जिसका उद्देश्य राज्य की लगातार बनी पॉटहोल समस्या को कम करना है।
आंध्र प्रदेश के परिवहन विभाग ने डेनिश‑उत्पत्ति फाइबर‑रिइन्फोर्स्ड एस्फाल्ट मिश्रण को चुनिंदा सड़क खंडों पर लागू करने के लिए एक पायलट परियोजना शुरू की है। इस नई सामग्री में सिंथेटिक फाइबर को बिटुमेन बाइंडर में मिलाया जाता है, जिससे दरारों के प्रतिरोध में सुधार और सड़क की आयु बढ़ाने की उम्मीद की जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि इस परीक्षण को सतह की टिकाऊपन, रख‑रखाव की आवृत्ति और पारंपरिक एस्फाल्ट की तुलना में लागत‑प्रभावशीलता जैसे मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो राज्य अपनी राजमार्ग नेटवर्क में इस तकनीक का व्यापक उपयोग करने पर विचार करेगा।
राज्य के सड़क प्राधिकरण ने कहा कि यह पहल मौसमी बाढ़ के दौरान पॉटहोल से उत्पन्न होने वाली बाधाओं को कम करने और बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने के व्यापक लक्ष्य के साथ संगत है। पायलट परीक्षण कई महीनों तक चलने के बाद एक औपचारिक समीक्षा की जाएगी।
यह परियोजना विदेशी सड़क‑निर्माण तकनीकों को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है, जो दीर्घकालिक रख‑रखाव लागत को घटाते हुए सतह की आयु बढ़ाने का वादा करती हैं।
अधिकारियों ने बताया कि इस परीक्षण को सतह की टिकाऊपन, रख‑रखाव की आवृत्ति और पारंपरिक एस्फाल्ट की तुलना में लागत‑प्रभावशीलता जैसे मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो राज्य अपनी राजमार्ग नेटवर्क में इस तकनीक का व्यापक उपयोग करने पर विचार करेगा।
राज्य के सड़क प्राधिकरण ने कहा कि यह पहल मौसमी बाढ़ के दौरान पॉटहोल से उत्पन्न होने वाली बाधाओं को कम करने और बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने के व्यापक लक्ष्य के साथ संगत है। पायलट परीक्षण कई महीनों तक चलने के बाद एक औपचारिक समीक्षा की जाएगी।
यह परियोजना विदेशी सड़क‑निर्माण तकनीकों को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है, जो दीर्घकालिक रख‑रखाव लागत को घटाते हुए सतह की आयु बढ़ाने का वादा करती हैं।