📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
स्वास्थ्य
अलवर अस्पताल के ब्लड बैंक की एसडीपी मशीन एक हफ्ते से बंद, मरीजों को निजी संस्थानों से 11,000 रुपये की कीमत चुकानी पड़ रही
✍️ Amar Ujala · Alwar
🗓 08 अक्टू. 2026, 03:15 PM
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अलवर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में बिजली बैकअप की समस्या के कारण एसडीपी मशीन एक हफ्ते से बंद है, जिससे डेंगू, कैंसर और अन्य गंभीर मरीजों को निजी संस्थानों से लगभग 11,000 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
अलवर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक ने बताया कि एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट) मशीन पिछले सात दिनों से बंद है। यह बंद होना अस्पताल की बिजली बैकअप प्रणाली में खराबी के कारण हुआ है, जो मशीन के संचालन के लिए अनिवार्य है।
डेंगू, कैंसर और अन्य गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को प्लेटलेट कंसंट्रेट की आवश्यकता होती है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अब इस सुविधा की कमी है। इस कारण कई मरीज निजी प्रयोगशालाओं की ओर रुख कर रहे हैं, जहाँ एक एसडीपी यूनिट की कीमत लगभग 11,000 रुपये बताई जा रही है।
यह अतिरिक्त खर्च गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है। अस्पताल के अधिकारियों ने समस्या को स्वीकार किया है, परंतु मशीन को फिर से चालू करने की समयसीमा का उल्लेख नहीं किया है।
स्वास्थ्य कार्यकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि एसडीपी मशीन की दीर्घकालिक अनुपलब्धता से रोगियों के उपचार में देरी हो सकती है, और वे त्वरित सुधार तथा बेहतर बैकअप व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
यह घटना सार्वजनिक अस्पतालों में आवश्यक उपकरणों के रख‑रखाव और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों को उजागर करती है।
डेंगू, कैंसर और अन्य गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को प्लेटलेट कंसंट्रेट की आवश्यकता होती है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अब इस सुविधा की कमी है। इस कारण कई मरीज निजी प्रयोगशालाओं की ओर रुख कर रहे हैं, जहाँ एक एसडीपी यूनिट की कीमत लगभग 11,000 रुपये बताई जा रही है।
यह अतिरिक्त खर्च गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है। अस्पताल के अधिकारियों ने समस्या को स्वीकार किया है, परंतु मशीन को फिर से चालू करने की समयसीमा का उल्लेख नहीं किया है।
स्वास्थ्य कार्यकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि एसडीपी मशीन की दीर्घकालिक अनुपलब्धता से रोगियों के उपचार में देरी हो सकती है, और वे त्वरित सुधार तथा बेहतर बैकअप व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
यह घटना सार्वजनिक अस्पतालों में आवश्यक उपकरणों के रख‑रखाव और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों को उजागर करती है।