📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Snehrashmi
विज्ञान
गुजरात में एआई ने 6,682 शेरों को रेल पटरियों से बचाया, दो साल में कोई शेर नहीं मारा गया
✍️ The Indian Express
🗓 19 अग. 2026, 01:33 PM
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गुजरात सरकार की एआई‑संचालित निगरानी ने 6,682 शेरों को रेल पटरियों से हटाया, जिससे दो साल में कोई शेर ट्रेन से नहीं मारा गया।
गुजरात सरकार ने रेल पटरियों के साथ मिलते जंगल क्षेत्रों में शेरों की सुरक्षा के लिए एआई‑आधारित निगरानी प्रणाली लागू की है। यह तकनीक शेरों को ट्रैक के पास आते ही पहचानती है और रेलवे अधिकारियों को सतर्क करती है ताकि जानवरों को सुरक्षित रूप से ट्रैक से हटाया जा सके।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस एआई प्लेटफ़ॉर्म ने 6,682 शेरों को सफलतापूर्वक मोड़ दिया है और इस अवधि में कोई शेर ट्रेन से नहीं मारा गया। यह परिणाम पहले की तुलना में वन्यजीव सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार दर्शाता है।
इस प्रणाली में गति‑सेंसिंग कैमरे, थर्मल इमेजिंग और रीयल‑टाइम डेटा विश्लेषण शामिल है, जो शेर की उपस्थिति का पता लगाते ही रेलवे नियंत्रण कक्ष को स्वचालित अलर्ट भेजता है। अलर्ट मिलने पर अस्थायी गति सीमा लागू की जाती है और शेर को वन में वापस ले जाने के लिए निर्धारित मार्ग सक्रिय किए जाते हैं।
राज्य के वन्यजीव अधिकारी बताते हैं कि यह पहल तकनीक को पारंपरिक संरक्षण उपायों के साथ जोड़ती है। वे एआई कवरेज को अन्य रेल सेक्शन तक बढ़ाने और इस डेटा को व्यापक वन्यजीव आंदोलन अध्ययन में शामिल करने की योजना बना रहे हैं।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो गुजरात अपने प्रतिष्ठित बड़े शेरों के लिए शून्य मृत्यु दर बनाए रखने और साथ ही रेल संचालन को बिना बाधा के चलाने का लक्ष्य रखता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस एआई प्लेटफ़ॉर्म ने 6,682 शेरों को सफलतापूर्वक मोड़ दिया है और इस अवधि में कोई शेर ट्रेन से नहीं मारा गया। यह परिणाम पहले की तुलना में वन्यजीव सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार दर्शाता है।
इस प्रणाली में गति‑सेंसिंग कैमरे, थर्मल इमेजिंग और रीयल‑टाइम डेटा विश्लेषण शामिल है, जो शेर की उपस्थिति का पता लगाते ही रेलवे नियंत्रण कक्ष को स्वचालित अलर्ट भेजता है। अलर्ट मिलने पर अस्थायी गति सीमा लागू की जाती है और शेर को वन में वापस ले जाने के लिए निर्धारित मार्ग सक्रिय किए जाते हैं।
राज्य के वन्यजीव अधिकारी बताते हैं कि यह पहल तकनीक को पारंपरिक संरक्षण उपायों के साथ जोड़ती है। वे एआई कवरेज को अन्य रेल सेक्शन तक बढ़ाने और इस डेटा को व्यापक वन्यजीव आंदोलन अध्ययन में शामिल करने की योजना बना रहे हैं।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो गुजरात अपने प्रतिष्ठित बड़े शेरों के लिए शून्य मृत्यु दर बनाए रखने और साथ ही रेल संचालन को बिना बाधा के चलाने का लक्ष्य रखता है।