📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Niraja shirude
शिक्षा
निरजा गोपाल जयाल ने वॉटसन व्याख्यान में भारतीय शैक्षणिक स्वतंत्रता पर चिंता जताई
✍️ Brown Daily Herald
🗓 10 सित. 2026, 01:39 PM
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राजनीति वैज्ञानिक निरजा गोपाल जयाल ने वॉटसन संस्थान में भारतीय शैक्षणिक स्वतंत्रता पर बढ़ती सीमाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती सेंसरशिप शैक्षणिक शोध और लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर कर सकती है।
राजनीति वैज्ञानिक निरजा गोपाल जयाल ने ब्राउन विश्वविद्यालय के वॉटसन संस्थान में एक व्याख्यान दिया, जहाँ उन्होंने भारत में शैक्षणिक स्वतंत्रता की स्थिति पर चर्चा की।
जयाल ने बताया कि हालिया सरकारी नीतियाँ और संस्थागत दबाव शोधकर्ताओं की स्वतंत्र जाँच-पड़ताल को सीमित कर रहे हैं। उन्होंने पाठ्यक्रम में सेंसरशिप और राजनीतिक हस्तक्षेप के उदाहरण दिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक समुदाय और भारतीय नीति निर्माताओं से आग्रह किया कि वे शैक्षणिक स्थानों की रक्षा करें, चेतावनी देते हुए कि शैक्षणिक स्वतंत्रता का क्षरण लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरे में डाल सकता है।
यह व्याख्यान वैश्विक शैक्षणिक स्वतंत्रता पर एक व्यापक श्रृंखला का हिस्सा था, और जयाल ने जोर दिया कि भारत की स्थिति अन्य देशों के लिए चेतावनी का काम करती है।
जयाल ने बताया कि हालिया सरकारी नीतियाँ और संस्थागत दबाव शोधकर्ताओं की स्वतंत्र जाँच-पड़ताल को सीमित कर रहे हैं। उन्होंने पाठ्यक्रम में सेंसरशिप और राजनीतिक हस्तक्षेप के उदाहरण दिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक समुदाय और भारतीय नीति निर्माताओं से आग्रह किया कि वे शैक्षणिक स्थानों की रक्षा करें, चेतावनी देते हुए कि शैक्षणिक स्वतंत्रता का क्षरण लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरे में डाल सकता है।
यह व्याख्यान वैश्विक शैक्षणिक स्वतंत्रता पर एक व्यापक श्रृंखला का हिस्सा था, और जयाल ने जोर दिया कि भारत की स्थिति अन्य देशों के लिए चेतावनी का काम करती है।