📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ms Sarah Welch
अपराध
छत्तीसगढ़-ओडिशा में 79 किग्रा ड्रग्स और पेंगलिन स्केल्स की तस्करी, 8 गिरफ्तार
✍️ The Times of India
🗓 16 सित. 2026, 04:02 AM
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छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पुलिस ने लगभग 79 किलोग्राम ड्रग्स और पेंगलिन के शल्क बरामद कर 8 लोगों को गिरफ्तार किया।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमा क्षेत्रों में पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में लगभग 79 किलोग्राम ड्रग्स और पेंगलिन के शल्क बरामद किए गए, साथ ही आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। यह तस्करी कार्यवाही दोनों राज्यों की पुलिस, नशा नियंत्रण ब्यूरो और वन विभाग के सहयोग से की गई, जिससे नशे और संरक्षित वन्यजीवों के बीच जुड़ी हुई आपराधिक जाल का खुलासा हुआ।
अधिकारी बताते हैं कि बरामद किए गए ड्रग्स में हेरोइन और सिंथेटिक स्टिमुलेंट्स का मिश्रण था, जबकि पेंगलिन के शल्क सीलबंद कंटेनरों में रखे हुए मिले, जो व्यवस्थित तस्करी का संकेत देते हैं। इस कार्रवाई में नशा नियंत्रण ब्यूरो और वन विभाग ने मिलकर आपराधिक साजिश को तोड़ने के लिए विशेष टीमें तैनात कीं।
जांच एजेंसियों ने ड्रग्स और वन्यजीव अपराधों के लिए अलग‑अलग केस फाइलें दर्ज कर ली हैं और आपूर्ति श्रृंखला को आगे ट्रेस करने की प्रक्रिया जारी है। गिरफ्तार किए गए आठ लोगों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है, और बरामद सामग्री को फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।
यह बड़ी तस्करी की बरामदगी भारतीय अधिकारियों को नशे और लुप्तप्राय प्रजातियों के बीच के जुड़ाव को समझने और रोकने की आवश्यकता की याद दिलाती है, और राज्य‑स्तर पर सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अधिकारी बताते हैं कि बरामद किए गए ड्रग्स में हेरोइन और सिंथेटिक स्टिमुलेंट्स का मिश्रण था, जबकि पेंगलिन के शल्क सीलबंद कंटेनरों में रखे हुए मिले, जो व्यवस्थित तस्करी का संकेत देते हैं। इस कार्रवाई में नशा नियंत्रण ब्यूरो और वन विभाग ने मिलकर आपराधिक साजिश को तोड़ने के लिए विशेष टीमें तैनात कीं।
जांच एजेंसियों ने ड्रग्स और वन्यजीव अपराधों के लिए अलग‑अलग केस फाइलें दर्ज कर ली हैं और आपूर्ति श्रृंखला को आगे ट्रेस करने की प्रक्रिया जारी है। गिरफ्तार किए गए आठ लोगों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है, और बरामद सामग्री को फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।
यह बड़ी तस्करी की बरामदगी भारतीय अधिकारियों को नशे और लुप्तप्राय प्रजातियों के बीच के जुड़ाव को समझने और रोकने की आवश्यकता की याद दिलाती है, और राज्य‑स्तर पर सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।