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06 Sep 2026
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7 लाख के मनरेगा पुल में ‘मिट्टी का खेल’? रेत की जगह खेत से खोदी मिट्टी का इस्तेमाल, निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

✍️ Reporter: Vishwanath Pratap Singh 🗓 04 Sep 2026, 10:16 PM 👁 5
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7 लाख के मनरेगा पुल में ‘मिट्टी का खेल’? रेत की जगह खेत से खोदी मिट्टी का इस्तेमाल, निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत कटबितला में मनरेगा योजना के तहत कराए जा रहे पुल निर्माण कार्य को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। निर्माण स्थल से सामने आए वीडियो ने काम की गुणवत्ता और जिम्मेदारों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है।
वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि मजदूर फावड़े से जमीन की मिट्टी खोद रहे हैं और उसी मिट्टी को निर्माण कार्य में इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि पुल निर्माण में रेत या निर्धारित निर्माण सामग्री के बजाय मैदान अथवा खेत से बहकर आई मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है।
सात लाख का काम… गुणवत्ता का क्या?

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार इस पुल निर्माण कार्य के लिए करीब 7 लाख रुपये की लागत स्वीकृत बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि लाखों रुपये की लागत वाले निर्माण में अगर मिट्टी का ही इस्तेमाल किया जा रहा है, तो पुल की मजबूती और गुणवत्ता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि निर्माण स्थल पर तकनीकी निगरानी कौन कर रहा है? मौके पर न इंजीनियर दिखाई देने की बात सामने आ रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी नजर आ रही है।
सरकारी पैसा… और जवाबदेही का सवाल
मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण सरकारी योजना में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित मापदंडों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन कटबितला में सामने आया वीडियो इन तमाम व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।

बताया जा रहा है कि यह कार्य जनपद सदस्य किशन कोशले से संबंधित है। हालांकि, इस संबंध में उनका अथवा संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। निर्माण में इस्तेमाल सामग्री वास्तव में स्वीकृत मापदंडों के अनुरूप है या नहीं, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

अब देखना होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद जनपद पंचायत और संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण सामग्री की जांच कराते हैं या नहीं।

क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा? और अगर जांच में अनियमितता सामने आती है, तो क्या कार्रवाई होगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं… क्योंकि सवाल सिर्फ एक पुल का नहीं, बल्कि लाखों रुपये के सरकारी धन और उसकी गुणवत्ता की निगरानी का है।
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