📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sir Charles Alfred Bell (1870-1945)
अपराध
9‑साल की मानसिक आयु, IQ 56: 29‑साल के आरोपी को मौत की सजा से बचाया गया
✍️ The Indian Express
🗓 27 अग. 2026, 04:48 AM
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IQ 56 और 9‑साल की मानसिक आयु वाले 29‑साल के आरोपी को बच्चे की हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी गई।
त्रायल कोर्ट ने एक बाल हत्या मामले में 29‑साल के आरोपी की दोषसिद्धि सुनाई, पर मौत की सजा नहीं दी। न्यायालय ने आरोपी के बौद्धिक स्तर को देखते हुए IQ 56 और लगभग 9 साल की मानसिक आयु का उल्लेख किया।
भारतीय कानून के अनुसार, मृत्युदंड के निर्णय में मानसिक दुर्बलता को ध्यान में रखना अनिवार्य है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों में कहा गया है। जज ने यह माना कि आरोपी की बौद्धिक कमी मृत्युदंड के मानदंड को पूरा नहीं करती, इसलिए उसे कारावास की सजा दी गई।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों पर मृत्युदंड लागू करने के प्रति न्यायपालिका की सतर्कता को दर्शाता है, और इस प्रकार ऐसे मामलों में दंड नीति पर चर्चा फिर से उभरी है।
पीड़ित परिवार ने सजा को लेकर निराशा जताई, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने मानसिक रूप से कमजोर लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत के इस निर्णय का स्वागत किया।
भारतीय कानून के अनुसार, मृत्युदंड के निर्णय में मानसिक दुर्बलता को ध्यान में रखना अनिवार्य है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों में कहा गया है। जज ने यह माना कि आरोपी की बौद्धिक कमी मृत्युदंड के मानदंड को पूरा नहीं करती, इसलिए उसे कारावास की सजा दी गई।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों पर मृत्युदंड लागू करने के प्रति न्यायपालिका की सतर्कता को दर्शाता है, और इस प्रकार ऐसे मामलों में दंड नीति पर चर्चा फिर से उभरी है।
पीड़ित परिवार ने सजा को लेकर निराशा जताई, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने मानसिक रूप से कमजोर लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत के इस निर्णय का स्वागत किया।