📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Digrajsingh
यात्रा
शेखावाटी की 14 ऐतिहासिक हवेलियों को यूनेस्को अस्थायी सूची में शामिल, विश्व धरोहर की उम्मीदें बढ़ीं
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 05 सित. 2026, 11:35 PM
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शेखावाटी के 14 ऐतिहासिक हवेलियों को, अलसीसर, मंडावा, नवलगढ़ और झुंझुनू सहित, यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया, जिससे विश्व धरोहर बनने की संभावना बढ़ी।
युनेस्को विश्व धरोहर केंद्र ने राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की चौदह ऐतिहासिक हवेलियों को अपनी अस्थायी सूची में शामिल किया, जो पूर्ण धरोहर मान्यता के लिए पहला आवश्यक कदम है। राज्य के पुरातत्व विभाग ने इस चयन की घोषणा की, जिसमें अलसीसर, मंडावा, नवलगढ़, झुंझुनू और अन्य दस स्थानों की हवेलियां सम्मिलित हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध व्यापारी‑संरचनात्मक विरासत को दर्शाती हैं।
शेखावाटी को अक्सर “राजस्थान की खुली कला दीर्घा” कहा जाता है; यहाँ की हवेलियों की दीवारों पर जटिल फ्रेस्को, रंगीन पेंटिंग और विस्तृत आंगन राजपूत और मुगल शैली का मिश्रण हैं। 18वीं सदी के उत्तरार्ध से 20वीं सदी की शुरुआत तक इन हवेलियों का निर्माण समृद्ध मारवाड़ी व्यापारियों ने किया, और आज ये शैक्षणिक तथा पर्यटन दोनों के लिए महत्वपूर्ण आकर्षण बन गई हैं।
अस्थायी सूची में शामिल होने से इन हवेलियों को पूर्ण विश्व धरोहर दर्जा मिलने की संभावना बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता से संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता, सांस्कृतिक पर्यटन में वृद्धि और नाजुक फ्रेस्को व संरचनात्मक धरोहर की सुरक्षा में मदद मिलेगी।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि अगले समीक्षा चक्र में युनेस्को को प्रस्तुत करने के लिए विस्तृत नामांकन दस्तावेज़ तैयार किया जाएगा, जिसमें संरक्षण योजना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को शामिल किया जाएगा।
शेखावाटी को अक्सर “राजस्थान की खुली कला दीर्घा” कहा जाता है; यहाँ की हवेलियों की दीवारों पर जटिल फ्रेस्को, रंगीन पेंटिंग और विस्तृत आंगन राजपूत और मुगल शैली का मिश्रण हैं। 18वीं सदी के उत्तरार्ध से 20वीं सदी की शुरुआत तक इन हवेलियों का निर्माण समृद्ध मारवाड़ी व्यापारियों ने किया, और आज ये शैक्षणिक तथा पर्यटन दोनों के लिए महत्वपूर्ण आकर्षण बन गई हैं।
अस्थायी सूची में शामिल होने से इन हवेलियों को पूर्ण विश्व धरोहर दर्जा मिलने की संभावना बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता से संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता, सांस्कृतिक पर्यटन में वृद्धि और नाजुक फ्रेस्को व संरचनात्मक धरोहर की सुरक्षा में मदद मिलेगी।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि अगले समीक्षा चक्र में युनेस्को को प्रस्तुत करने के लिए विस्तृत नामांकन दस्तावेज़ तैयार किया जाएगा, जिसमें संरक्षण योजना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को शामिल किया जाएगा।