📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Association for Computing Machinery
राजनीति
111 सांसद और विधायक चार साल में बदलें पार्टी, 26% भाजपा में शामिल, ADR रिपोर्ट
✍️ Bhaskar English
🗓 27 सित. 2026, 10:16 PM
👁 14
ADR की नई रिपोर्ट के अनुसार 2020‑2024 में 111 सांसद और विधायक ने पार्टी बदली, जिसमें 26 % ने भाजपा में शामिल हुए।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने 2020 से 2024 तक के चार साल के अंतराल में 111 सांसद‑विधायकों ने पार्टी बदली, ऐसा विस्तृत विश्लेषण जारी किया। इस आंकड़े में 26 % प्रतिनिधियों ने भाजपा में शामिल होकर सबसे बड़ा लाभ उठाया।
रिपोर्ट में नागालैंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी बदलने की उल्लेखनीय प्रवृत्ति को उजागर किया गया है, जहाँ कई विधायक या तो भाजपा या अन्य क्षेत्रीय दलों में चले गए। कुल संख्या में यह छोटा भाग है, परन्तु भारतीय राजनीति में बढ़ती लचीलापन को दर्शाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी और भाजपा के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाती है। ADR ने आधिकारिक चुनावी दस्तावेज़ों और पार्टी रिकॉर्डों के आधार पर यह डेटा तैयार किया है, जिसमें कोई एकल कारण नहीं बताया गया, परन्तु चुनावी गणना और वैचारिक बदलाव प्रमुख कारण माने गए हैं।
इन निष्कर्षों के साथ देश अगली आम चुनावी चक्र की तैयारी में है, जिससे पार्टियों को अपने उम्मीदवारों की निष्ठा और गठबंधन की रणनीति पुनः विचारनी पड़ेगी। यह देखना होगा कि भाजपा इन परिवर्तनों को वास्तविक मतदाताओं के समर्थन में कैसे बदल पाती है।
रिपोर्ट में नागालैंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी बदलने की उल्लेखनीय प्रवृत्ति को उजागर किया गया है, जहाँ कई विधायक या तो भाजपा या अन्य क्षेत्रीय दलों में चले गए। कुल संख्या में यह छोटा भाग है, परन्तु भारतीय राजनीति में बढ़ती लचीलापन को दर्शाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी और भाजपा के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाती है। ADR ने आधिकारिक चुनावी दस्तावेज़ों और पार्टी रिकॉर्डों के आधार पर यह डेटा तैयार किया है, जिसमें कोई एकल कारण नहीं बताया गया, परन्तु चुनावी गणना और वैचारिक बदलाव प्रमुख कारण माने गए हैं।
इन निष्कर्षों के साथ देश अगली आम चुनावी चक्र की तैयारी में है, जिससे पार्टियों को अपने उम्मीदवारों की निष्ठा और गठबंधन की रणनीति पुनः विचारनी पड़ेगी। यह देखना होगा कि भाजपा इन परिवर्तनों को वास्तविक मतदाताओं के समर्थन में कैसे बदल पाती है।