📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NAPARAZZI
राजनीति
ज़ीपीएम और एमएनएफ ने मिज़ोरम में एनडीए गठबंधन के लिए किया दावेदारी, कांग्रेस ने कहा
✍️ India Today NE
🗓 28 अग. 2026, 10:37 PM
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कांग्रेस के बयान के अनुसार ज़ीपीएम और एमएनएफ दोनों मिज़ोरम में एनडीए गठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं।
नई दिल्ली की कांग्रेस ने बताया कि ज़ीपीएम (ज़ोराम पीपल्स मूवमेंट) और एमएनएफ (मिज़ो नेशनल फ्रंट) दोनों ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं, जो मिज़ोरम में आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। दोनों क्षेत्रीय दल, जिनके मतदाता आधार अलग‑अलग हैं, भाजपा‑नेतृत्व वाली गठबंधन से अलग‑अलग प्रस्ताव रख रहे हैं, ताकि राष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बना सकें।
जानकारी के अनुसार, ज़ीपीएम अपने विकास एजेंडा और जनजातीय समुदायों तक पहुंच को प्रमुखता दे रहा है, जबकि सत्ता में रहने वाला एमएनएफ अपनी प्रशासनिक उपलब्धियों को प्रमुख बिंदु बना रहा है। दोनों दल वरिष्ठ एनडीए नेताओं के साथ बातचीत में लगे हुए हैं, ताकि संभावित साझेदारी की शर्तों को समझा जा सके।
कांग्रेस के विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रतिस्पर्धा उत्तरपूर्व में बदलते राजनीतिक परिदृश्य का संकेत है, जहाँ भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। एनडीए के साथ गठबंधन से क्षेत्रीय दलों को केंद्र सरकार की बुनियादी ढांचा और कल्याण योजनाओं तक आसान पहुँच मिल सकती है, जिससे आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार चयन पर असर पड़ सकता है।
अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, पर यह राजनीतिक चाल मिज़ोरम के भविष्य के गठबंधन और विकास दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जानकारी के अनुसार, ज़ीपीएम अपने विकास एजेंडा और जनजातीय समुदायों तक पहुंच को प्रमुखता दे रहा है, जबकि सत्ता में रहने वाला एमएनएफ अपनी प्रशासनिक उपलब्धियों को प्रमुख बिंदु बना रहा है। दोनों दल वरिष्ठ एनडीए नेताओं के साथ बातचीत में लगे हुए हैं, ताकि संभावित साझेदारी की शर्तों को समझा जा सके।
कांग्रेस के विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रतिस्पर्धा उत्तरपूर्व में बदलते राजनीतिक परिदृश्य का संकेत है, जहाँ भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। एनडीए के साथ गठबंधन से क्षेत्रीय दलों को केंद्र सरकार की बुनियादी ढांचा और कल्याण योजनाओं तक आसान पहुँच मिल सकती है, जिससे आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार चयन पर असर पड़ सकता है।
अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, पर यह राजनीतिक चाल मिज़ोरम के भविष्य के गठबंधन और विकास दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।