📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Colin Smith
स्थानीय
नागालैंड में द्वितीय विश्व युद्ध का प्रोपेलर बना चर्च का घंटा
✍️ MorungExpress
🗓 04 नव. 2026, 10:33 AM
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द्वितीय विश्व युद्ध के एक विमान के प्रोपेलर को नागालैंड के एक चर्च के घंटा के रूप में पुनः उपयोग किया गया है। यह धातु का टुकड़ा, जो पहले युद्धकालीन विमान का हिस्सा था, अब दूरस्थ क्षेत्र में सेवाओं के दौरान बजता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के एक विमान के प्रोपेलर को नागालैंड के एक चर्च में घंटा के रूप में स्थापित किया गया है। यह धातु का रोटर, एक दुर्घटनाग्रस्त विमान से पुनः प्राप्त, साफ़ करके उसमें एक क्लैपर लगाया गया है ताकि पूजा के दौरान एक गूंजती ध्वनि उत्पन्न हो सके।
स्थानीय चर्च के अधिकारियों का कहना है कि प्रोपेलर का यह उपयोग दृढ़ता और स्मरण का प्रतीक है। "यह हमें अतीत की याद दिलाता है और भविष्य के लिए आशा जगाता है," एक पादरी ने कहा, हालांकि कोई आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं किया गया है।
समुदाय ने इस अनोखे घंटा को स्वागत किया है, जो पहले ही आसपास के गांवों के आगंतुकों को आकर्षित कर चुका है। घंटा की विशिष्ट ध्वनि को विमान की दूरस्थ गर्जना की याद दिलाने वाली कहा जाता है, जो आध्यात्मिक वातावरण में ऐतिहासिक परत जोड़ती है।
अधिकारियों ने अभी तक प्रोपेलर के मूल के बारे में आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की है, लेकिन प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह 1950 के दशक में क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुए यू‑2 जासूसी विमान से गिरा हो सकता है।
स्थानीय चर्च के अधिकारियों का कहना है कि प्रोपेलर का यह उपयोग दृढ़ता और स्मरण का प्रतीक है। "यह हमें अतीत की याद दिलाता है और भविष्य के लिए आशा जगाता है," एक पादरी ने कहा, हालांकि कोई आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं किया गया है।
समुदाय ने इस अनोखे घंटा को स्वागत किया है, जो पहले ही आसपास के गांवों के आगंतुकों को आकर्षित कर चुका है। घंटा की विशिष्ट ध्वनि को विमान की दूरस्थ गर्जना की याद दिलाने वाली कहा जाता है, जो आध्यात्मिक वातावरण में ऐतिहासिक परत जोड़ती है।
अधिकारियों ने अभी तक प्रोपेलर के मूल के बारे में आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की है, लेकिन प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह 1950 के दशक में क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुए यू‑2 जासूसी विमान से गिरा हो सकता है।