📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Owen Jones
स्वास्थ्य
वर्ल्ड स्पाइन डे: कमर दर्द से दांपत्य जीवन पर बढ़ा असर
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 16 अक्टू. 2026, 02:31 PM
👁 16
एक सर्वेक्षण बताता है कि कमर दर्द ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी, मानसिक स्वास्थ्य और दांपत्य संबंधों को बिगाड़ा है, खासकर 30‑45 वर्ष के युवाओं में।
वर्ल्ड स्पाइन डे ने इस साल एक बढ़ते स्वास्थ्य मुद्दे पर प्रकाश डाला है: कमर दर्द अब केवल उठने‑बैठने के समय होने वाले हल्के दर्द तक सीमित नहीं रहा। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या अब दैनिक कार्य, मानसिक स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में भी बाधा बन रही है, जिससे कई जोड़ों पर तनाव बढ़ रहा है।
शहरी और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि 30‑45 वर्ष की आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक दर्द और उससे जुड़ी तनाव की रिपोर्ट कर रहे हैं। यह दर्द शारीरिक अंतरंगता में कमी, नींद में खलल और चिंता को बढ़ा देता है, जिससे कुल मिलाकर दंपति का बोझ बढ़ जाता है।
डॉक्टर शुरुआती पहचान, नियमित फिजियोथेरेपी, कार्यस्थल और घर में एर्गोनोमिक बदलाव, तथा वजन नियंत्रण और लक्षित व्यायाम जैसी जीवनशैली में बदलाव की सलाह देते हैं। वर्ल्ड स्पाइन डे के दौरान चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों में नागरिकों को रोकथाम के उपायों के बारे में शिक्षित किया जा रहा है और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और कई NGOs द्वारा समन्वित इस अभियान में कार्यशालाएँ, ऑनलाइन वेबिनार और प्रमुख शहरों में सूचना पुस्तिकाएँ वितरित की जा रही हैं। आयोजक आशा करते हैं कि जागरूक नागरिक स्वस्थ रीढ़‑देखभाल की आदतें अपनाएँगे, जिससे जीवन की गुणवत्ता और दांपत्य सौहार्द दोनों में सुधार होगा।
हालांकि यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है, लेकिन उन क्षेत्रों में इसका असर अधिक है जहाँ बैठी‑बैठी नौकरियों और सीमित मनोरंजन सुविधाओं के कारण पुरानी कमर दर्द की समस्या में वृद्धि देखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रवृत्ति को उलटने और शारीरिक‑मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है।
शहरी और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि 30‑45 वर्ष की आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक दर्द और उससे जुड़ी तनाव की रिपोर्ट कर रहे हैं। यह दर्द शारीरिक अंतरंगता में कमी, नींद में खलल और चिंता को बढ़ा देता है, जिससे कुल मिलाकर दंपति का बोझ बढ़ जाता है।
डॉक्टर शुरुआती पहचान, नियमित फिजियोथेरेपी, कार्यस्थल और घर में एर्गोनोमिक बदलाव, तथा वजन नियंत्रण और लक्षित व्यायाम जैसी जीवनशैली में बदलाव की सलाह देते हैं। वर्ल्ड स्पाइन डे के दौरान चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों में नागरिकों को रोकथाम के उपायों के बारे में शिक्षित किया जा रहा है और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और कई NGOs द्वारा समन्वित इस अभियान में कार्यशालाएँ, ऑनलाइन वेबिनार और प्रमुख शहरों में सूचना पुस्तिकाएँ वितरित की जा रही हैं। आयोजक आशा करते हैं कि जागरूक नागरिक स्वस्थ रीढ़‑देखभाल की आदतें अपनाएँगे, जिससे जीवन की गुणवत्ता और दांपत्य सौहार्द दोनों में सुधार होगा।
हालांकि यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है, लेकिन उन क्षेत्रों में इसका असर अधिक है जहाँ बैठी‑बैठी नौकरियों और सीमित मनोरंजन सुविधाओं के कारण पुरानी कमर दर्द की समस्या में वृद्धि देखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रवृत्ति को उलटने और शारीरिक‑मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है।