📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / IT Section Sindh Archives
राजनीति
वर्ल्ड सिंध काउंसिल ने यूएनएचआरसी से सिंध के विभाजन पर रोक का आग्रह किया
✍️ Asianet Newsable
🗓 26 सित. 2026, 02:37 AM
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वर्ल्ड सिंध काउंसिल ने यूएनएचआरसी से पाकिस्तान के सिंध प्रांत को विभाजित करने वाले प्रस्तावों पर रोक लगाने का अनुरोध किया।
वर्ल्ड सिंध काउंसिल (डब्ल्यूएससी) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से पाकिस्तान के सिंध प्रांत को विभाजित करने के प्रस्ताव पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया है। काउंसिल ने कहा कि यह योजना सिंध की क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डाल सकती है और वहाँ रहने वाले लोगों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
प्रस्तावित विभाजन को कुछ राजनीतिक समूहों द्वारा सिंध की सीमाओं को पुनः निर्धारित करने के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे प्रांत के कुछ हिस्सों को अलग‑अलग इकाइयों में बाँटा जाएगा। डब्ल्यूएससी का मानना है कि यह कदम संविधानिक आधार से रहित है और क्षेत्र में जातीय तनाव को बढ़ा सकता है।
काउंसिल ने चेतावनी दी कि इस तरह का विभाजन सिंधी लोगों की सांस्कृतिक, भाषाई और राजनीतिक पहचान को कमजोर करेगा, जिससे भेदभाव और हाशिए पर जाने की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने यूएनएचआरसी से इस मुद्दे की मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य में जांच करने और किसी भी पुनर्गठन के खिलाफ औपचारिक सिफ़ारिश जारी करने का अनुरोध किया।
यूएनएचआरसी ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह अपील अंतरराष्ट्रीय दबाव को बढ़ा रही है, जिससे पाकिस्तान की सरकार को इस योजना को आगे बढ़ाने से पहले पुनर्विचार करने का अवसर मिल सकता है।
प्रस्तावित विभाजन को कुछ राजनीतिक समूहों द्वारा सिंध की सीमाओं को पुनः निर्धारित करने के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे प्रांत के कुछ हिस्सों को अलग‑अलग इकाइयों में बाँटा जाएगा। डब्ल्यूएससी का मानना है कि यह कदम संविधानिक आधार से रहित है और क्षेत्र में जातीय तनाव को बढ़ा सकता है।
काउंसिल ने चेतावनी दी कि इस तरह का विभाजन सिंधी लोगों की सांस्कृतिक, भाषाई और राजनीतिक पहचान को कमजोर करेगा, जिससे भेदभाव और हाशिए पर जाने की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने यूएनएचआरसी से इस मुद्दे की मानवाधिकार परिप्रेक्ष्य में जांच करने और किसी भी पुनर्गठन के खिलाफ औपचारिक सिफ़ारिश जारी करने का अनुरोध किया।
यूएनएचआरसी ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह अपील अंतरराष्ट्रीय दबाव को बढ़ा रही है, जिससे पाकिस्तान की सरकार को इस योजना को आगे बढ़ाने से पहले पुनर्विचार करने का अवसर मिल सकता है।