📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Chinchu.c
शिक्षा
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: स्कूलों के लिए नीति अभी तक नहीं शुरू
✍️ Amar Ujala
🗓 10 अक्टू. 2026, 07:47 AM
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों के लिए विशेष मानसिक‑स्वास्थ्य नीति का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ, जिससे शिक्षकों में चिंता बढ़ी।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस आज भारत में बड़े पैमाने पर मनाया गया, जिससे शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक‑स्वास्थ्य समर्थन की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ा। इस अवसर के बावजूद, सरकारी स्रोतों ने बताया कि स्कूलों के लिए विशेष मानसिक‑स्वास्थ्य नीति का मसौदा तैयार करने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। इस देरी पर शिक्षकों के संघ और मानसिक‑स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है, क्योंकि छात्रों को बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें संरचित मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
शिक्षा मंत्रालय ने पहले स्कूलों में काउंसलिंग सेवाएँ, शिक्षक प्रशिक्षण और संकट प्रतिक्रिया तंत्र को शामिल करने वाला ढांचा बनाने का इरादा जताया था। लेकिन आज तक कोई औपचारिक समिति गठित नहीं हुई है और कोई मसौदा सार्वजनिक टिप्पणी के लिए नहीं भेजा गया है। हितधारकों को डर है कि स्पष्ट योजना के अभाव में छात्रों के तनाव, अवसाद आदि समस्याओं के लिए समय पर हस्तक्षेप संभव नहीं हो पाएगा।
यह मुद्दा उच्च शिक्षा से जुड़े यूजीसी के दिशा‑निर्देशों के विलंब से भी जुड़ा है, जो अभी भी अटके हुए हैं। जबकि यूजीसी का मामला अलग है, दोनों देरी मिलकर शिक्षा क्षेत्र में मानसिक‑स्वास्थ्य की जरूरतों को संबोधित करने में प्रणालीगत कमी को उजागर करती हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ सरकार से नीति निर्माण प्रक्रिया को तेज़ करने का आग्रह कर रहे हैं, यह कहते हुए कि प्रारम्भिक रोकथाम उपाय दीर्घकालिक सामाजिक लागत को कम कर सकते हैं। वे त्वरित हितधारक परामर्श और एक पारदर्शी समय‑सीमा की मांग कर रहे हैं, ताकि स्कूल छात्रों के कल्याण को सुनिश्चित कर सकें।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के दौरान वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जबकि भारत में स्कूल मानसिक‑स्वास्थ्य नीति पर ठोस कार्रवाई की कमी एक महत्वपूर्ण अंतराल बनकर उभरी है, जिसे शीघ्र समाधान की आवश्यकता है।
शिक्षा मंत्रालय ने पहले स्कूलों में काउंसलिंग सेवाएँ, शिक्षक प्रशिक्षण और संकट प्रतिक्रिया तंत्र को शामिल करने वाला ढांचा बनाने का इरादा जताया था। लेकिन आज तक कोई औपचारिक समिति गठित नहीं हुई है और कोई मसौदा सार्वजनिक टिप्पणी के लिए नहीं भेजा गया है। हितधारकों को डर है कि स्पष्ट योजना के अभाव में छात्रों के तनाव, अवसाद आदि समस्याओं के लिए समय पर हस्तक्षेप संभव नहीं हो पाएगा।
यह मुद्दा उच्च शिक्षा से जुड़े यूजीसी के दिशा‑निर्देशों के विलंब से भी जुड़ा है, जो अभी भी अटके हुए हैं। जबकि यूजीसी का मामला अलग है, दोनों देरी मिलकर शिक्षा क्षेत्र में मानसिक‑स्वास्थ्य की जरूरतों को संबोधित करने में प्रणालीगत कमी को उजागर करती हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ सरकार से नीति निर्माण प्रक्रिया को तेज़ करने का आग्रह कर रहे हैं, यह कहते हुए कि प्रारम्भिक रोकथाम उपाय दीर्घकालिक सामाजिक लागत को कम कर सकते हैं। वे त्वरित हितधारक परामर्श और एक पारदर्शी समय‑सीमा की मांग कर रहे हैं, ताकि स्कूल छात्रों के कल्याण को सुनिश्चित कर सकें।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के दौरान वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जबकि भारत में स्कूल मानसिक‑स्वास्थ्य नीति पर ठोस कार्रवाई की कमी एक महत्वपूर्ण अंतराल बनकर उभरी है, जिसे शीघ्र समाधान की आवश्यकता है।