📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / M Tracy Hunter
देश
विश्व बैंक के आंकड़ों से उजागर, 12 साल में भारत में गरीबी में बड़ा गिरावट
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 04 नव. 2026, 06:16 PM
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विश्व बैंक के आँकड़े दिखाते हैं कि पिछले बारह वर्षों में भारत में गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो आर्थिक‑सामाजिक प्रगति को दर्शाती है।
विश्व बैंक के नवीनतम गरीबी सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले बारह वर्षों में अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले भारतीयों का प्रतिशत उल्लेखनीय रूप से घटा है। यह आंकड़ा 2011 से चल रहे गिरावट के रुझान को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय सर्वेक्षणों और आर्थिक आँकड़ों पर आधारित है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार में भारत की समग्र आर्थिक वृद्धि, रोजगार में वृद्धि और प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण तथा ग्रामीण रोजगार गारंटी जैसे बड़े सामाजिक कार्यक्रमों की भूमिका प्रमुख है। शिक्षा में नामांकन और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ने भी कई परिवारों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकालने में मदद की है।
फिर भी विश्लेषकों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि गरीबी में कमी समान रूप से नहीं हुई है। कुछ राज्यों और हाशिए पर रहने वाले समूह अभी भी पिछड़े हुए हैं, और हालिया महामारी ने मौजूदा कमजोरियों को उजागर किया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट नीति निर्माताओं से समावेशी विकास पर ध्यान जारी रखने का आग्रह करती है, ताकि अब तक की प्रगति को स्थायी बनाया जा सके।
इन आँकड़ों को देखते हुए आगामी योजना अवधि में गरीबी उन्मूलन, वित्तीय आवंटन और भविष्य के कल्याणकारी योजनाओं के डिजाइन पर चर्चा में यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार में भारत की समग्र आर्थिक वृद्धि, रोजगार में वृद्धि और प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण तथा ग्रामीण रोजगार गारंटी जैसे बड़े सामाजिक कार्यक्रमों की भूमिका प्रमुख है। शिक्षा में नामांकन और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ने भी कई परिवारों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकालने में मदद की है।
फिर भी विश्लेषकों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि गरीबी में कमी समान रूप से नहीं हुई है। कुछ राज्यों और हाशिए पर रहने वाले समूह अभी भी पिछड़े हुए हैं, और हालिया महामारी ने मौजूदा कमजोरियों को उजागर किया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट नीति निर्माताओं से समावेशी विकास पर ध्यान जारी रखने का आग्रह करती है, ताकि अब तक की प्रगति को स्थायी बनाया जा सके।
इन आँकड़ों को देखते हुए आगामी योजना अवधि में गरीबी उन्मूलन, वित्तीय आवंटन और भविष्य के कल्याणकारी योजनाओं के डिजाइन पर चर्चा में यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।