📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Debbie Mccallum
स्थानीय
उत्तarakhand के गांव में महिलाओं ने रात की सुरक्षा के लिए गश्त शुरू की
✍️ Rediff
🗓 30 अग. 2026, 08:33 PM
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उत्तarakhand के एक दूरस्थ गांव में महिलाओं ने बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के जवाब में रात की गश्त शुरू की है।
उत्तarakhand के एक छोटे से गांव में महिलाओं ने शाम के बाद गश्त शुरू कर दी है, ताकि चोरी‑चिकित्सा और उत्पीड़न जैसी समस्याओं को रोका जा सके और सभी निवासियों को सुरक्षित महसूस हो। यह कदम कई चोरी और महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाओं के बाद उठाया गया, जिसने गांव में असुरक्षा की भावना पैदा की थी।
स्थानीय महिला समूह ने इस पहल को व्यवस्थित किया है। वे साप्ताहिक बैठकें करके गश्त के मार्ग, ड्यूटी समय और गांव के सरपंच के साथ समन्वय तय करते हैं। आमतौर पर दो‑तीन महिलाएं रात 9 बजे से मध्यरात्रि तक टॉर्च और प्राथमिक चिकित्सा किट लेकर साथ चलती हैं और किसी भी घटना को दर्ज करके निकटतम पुलिस थाने को सूचित करती हैं।
गांव वालों ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि गश्त शुरू होने के बाद से संदिग्ध गतिविधियों में कमी आई है। गांव के सरपंच ने इस पहल की सराहना की और पुलिस को भी नियमित गश्त बढ़ाने का आग्रह किया।
जिला पुलिस प्रमुख ने कहा कि समुदाय‑आधारित सुरक्षा उपाय आधिकारिक पुलिस कार्य को पूरक करते हैं और राज्य भर में महिलाओं को सार्वजनिक सुरक्षा में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
स्थानीय महिला समूह ने इस पहल को व्यवस्थित किया है। वे साप्ताहिक बैठकें करके गश्त के मार्ग, ड्यूटी समय और गांव के सरपंच के साथ समन्वय तय करते हैं। आमतौर पर दो‑तीन महिलाएं रात 9 बजे से मध्यरात्रि तक टॉर्च और प्राथमिक चिकित्सा किट लेकर साथ चलती हैं और किसी भी घटना को दर्ज करके निकटतम पुलिस थाने को सूचित करती हैं।
गांव वालों ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि गश्त शुरू होने के बाद से संदिग्ध गतिविधियों में कमी आई है। गांव के सरपंच ने इस पहल की सराहना की और पुलिस को भी नियमित गश्त बढ़ाने का आग्रह किया।
जिला पुलिस प्रमुख ने कहा कि समुदाय‑आधारित सुरक्षा उपाय आधिकारिक पुलिस कार्य को पूरक करते हैं और राज्य भर में महिलाओं को सार्वजनिक सुरक्षा में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे।