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27 सित. 2026•
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लिंग के कारण नौकरी से वंचित, सुमित्रा ने 37 साल के संघर्ष में जीत हासिल की
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
नौकरी

लिंग के कारण नौकरी से वंचित, सुमित्रा ने 37 साल के संघर्ष में जीत हासिल की

✍️ The Indian Express 🗓 27 सित. 2026, 10:18 AM 👁 12
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लिंग के कारण अस्थायी पद से वंचित सुमित्रा ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के खिलाफ 37 साल के मुक़ाबले में अदालत से जीत हासिल की।

सुमित्रा को एक बड़े सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने लिंग के कारण अस्थायी पद से वंचित कर दिया था। इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने न्यायालय में केस दायर किया, जो 37 वर्षों तक चला और भारत के सबसे लंबे रोजगार‑भेदभाव मामलों में से एक बन गया।

अदालत ने इस बात को स्पष्ट किया कि कंपनी का यह कदम भेदभावपूर्ण था और समान अवसर के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इसके साथ ही कंपनी को सुमित्रा को उचित राहत प्रदान करने और रोजगार के अवसर देने का आदेश दिया गया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मौजूदा श्रम कानूनों को सुदृढ़ करता है और सभी सार्वजनिक‑निजी संस्थानों को लिंग‑समता को नजरअंदाज करने की कीमत दिखाता है। भविष्य में समान मामलों में इस निर्णय का हवाला दिया जा सकता है।

महिला अधिकार संगठनों ने इस जीत का स्वागत किया है, इसे लिंग न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना है और यह दर्शाता है कि लंबी कानूनी लड़ाइयों के बाद भी न्याय मिल सकता है।

सुमित्रा की दृढ़ता उन कई महिलाओं को प्रेरित करेगी जो कार्यस्थल में समानता की मांग करती हैं और कानूनी उपायों की ओर कदम बढ़ाने का साहस देती है।
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