📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Goutam1962
धर्म
2027 तक गंगासागर मेला को अंतरराष्ट्रीय बनायेगा पश्चिम बंगाल, सीएम का ऐलान
✍️ Daily Excelsior
🗓 31 अक्टू. 2026, 06:15 AM
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री अधकारी ने कहा कि गंगासागर मेला 2027 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होगा, जिससे विश्वभर के श्रद्धालु आएँगे।
कोलकाता, 31 अक्टूबर — पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री अधकारी ने घोषणा की कि सागर द्वीप पर आयोजित वार्षिक गंगासागर मेला 2027 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होगा। यह घोषणा कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई, जहाँ उन्होंने बुनियादी ढाँचा सुधार, भीड़ प्रबंधन को सुदृढ़ और वैश्विक पर्यटन मंचों पर मेले को प्रोमोट करने की योजना बताई।
इस कदम का उद्देश्य गंगासागर को विश्व‑प्रसिद्ध धार्मिक सम्मेलनों में शामिल करना है, जिससे विदेशियों और विदेशी हिंदू समुदायों की भागीदारी बढ़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि फेरी सेवाओं का विस्तार, स्वच्छता सुविधाओं का आधुनिकीकरण और बहुभाषी सूचना केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि गैर‑हिंदी और गैर‑बंगाली यात्रियों की सुविधा हो सके।
पर्यटन एवं तीर्थ विभाग को 2025 तक पायलट पहल लागू करने का कार्य सौंपा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान में कोई बदलाव नहीं होगा, बल्कि मेले के पैमाने को बढ़ाते हुए उसकी आध्यात्मिक भावना को बरकरार रखा जाएगा।
स्थानीय व्यापारियों और NGOs ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया, क्योंकि इससे द्वीप के निवासियों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही उन्होंने पर्यावरणीय चिंताओं को भी उठाया, क्योंकि गंगा डेल्टा का पारिस्थितिक तंत्र नाज़ुक है।
यह घोषणा पश्चिम बंगाल की धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और 2028 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले राज्य की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
इस कदम का उद्देश्य गंगासागर को विश्व‑प्रसिद्ध धार्मिक सम्मेलनों में शामिल करना है, जिससे विदेशियों और विदेशी हिंदू समुदायों की भागीदारी बढ़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि फेरी सेवाओं का विस्तार, स्वच्छता सुविधाओं का आधुनिकीकरण और बहुभाषी सूचना केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि गैर‑हिंदी और गैर‑बंगाली यात्रियों की सुविधा हो सके।
पर्यटन एवं तीर्थ विभाग को 2025 तक पायलट पहल लागू करने का कार्य सौंपा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान में कोई बदलाव नहीं होगा, बल्कि मेले के पैमाने को बढ़ाते हुए उसकी आध्यात्मिक भावना को बरकरार रखा जाएगा।
स्थानीय व्यापारियों और NGOs ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया, क्योंकि इससे द्वीप के निवासियों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही उन्होंने पर्यावरणीय चिंताओं को भी उठाया, क्योंकि गंगा डेल्टा का पारिस्थितिक तंत्र नाज़ुक है।
यह घोषणा पश्चिम बंगाल की धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और 2028 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले राज्य की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।