📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Aritra das 21
बिज़नेस
पिछले पाँच सालों से पश्चिम बंगाल ने पुजा बजट कम आँका, 2026 की स्थिति अनिश्चित
✍️ Moneycontrol.com
🗓 10 सित. 2026, 01:48 AM
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राज्य के वित्तीय आंकड़ों से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल ने 2020 से हर वित्तीय वर्ष में दुर्गा पूजा खर्च को कम आँका है, जिससे 2026 के बजट को लेकर सवाल उठे हैं।
पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग ने यह दिखाया है कि दुर्गा पूजा के खर्च का अनुमान लगातार कम लगाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2020‑21 से अब तक बजट दस्तावेज़ों में घोषित राशि वास्तविक खर्च से कम रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा‑संबंधी बुनियादी ढाँचे का तेज़ विस्तार, सजावट, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं की बढ़ती लागतें, वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए सीमित अनुमान से अधिक हो गई हैं। इस अंतर ने राज्य को आकस्मिक कोष से निकासी करने और कभी‑कभी मध्य‑वर्ष में अतिरिक्त अनुमोदन मांगने पर मजबूर किया है।
आगामी वित्तीय वर्ष 2026‑27 के बजट की तैयारी के दौरान इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वित्त मंत्रालय ने पिछले अनुमानों की पुनः समीक्षा का संकेत दिया है, परन्तु अभी तक कोई स्पष्ट आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, जिससे हितधारकों में अनिश्चितता बनी हुई है।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो राज्य को बड़े आपातकालीन आरक्षित निधि आवंटित करनी पड़ सकती है या राजस्व अनुमान को पुनः समायोजित करना पड़ सकता है, जिससे अन्य विकास परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि अधिक यथार्थवादी बजटिंग से वित्तीय अनुशासन सुधरेगा और आकस्मिक समायोजन की आवश्यकता कम होगी।
यह स्थिति दर्शाती है कि एक ऐसी राज्य में जहाँ दुर्गा पूजा सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक गतिविधि दोनों का प्रमुख केंद्र है, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के खर्च को वित्तीय योजना के साथ संतुलित करना कितना चुनौतीपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा‑संबंधी बुनियादी ढाँचे का तेज़ विस्तार, सजावट, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं की बढ़ती लागतें, वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए सीमित अनुमान से अधिक हो गई हैं। इस अंतर ने राज्य को आकस्मिक कोष से निकासी करने और कभी‑कभी मध्य‑वर्ष में अतिरिक्त अनुमोदन मांगने पर मजबूर किया है।
आगामी वित्तीय वर्ष 2026‑27 के बजट की तैयारी के दौरान इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वित्त मंत्रालय ने पिछले अनुमानों की पुनः समीक्षा का संकेत दिया है, परन्तु अभी तक कोई स्पष्ट आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, जिससे हितधारकों में अनिश्चितता बनी हुई है।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो राज्य को बड़े आपातकालीन आरक्षित निधि आवंटित करनी पड़ सकती है या राजस्व अनुमान को पुनः समायोजित करना पड़ सकता है, जिससे अन्य विकास परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि अधिक यथार्थवादी बजटिंग से वित्तीय अनुशासन सुधरेगा और आकस्मिक समायोजन की आवश्यकता कम होगी।
यह स्थिति दर्शाती है कि एक ऐसी राज्य में जहाँ दुर्गा पूजा सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक गतिविधि दोनों का प्रमुख केंद्र है, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के खर्च को वित्तीय योजना के साथ संतुलित करना कितना चुनौतीपूर्ण है।