📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep
शिक्षा
पश्चिम बंगाल के सीएम अधिराज ने स्कूलों में मोबाइल प्रतिबंध की मांग, गुजरात मॉडल का हवाला
✍️ The Indian Express
🗓 05 सित. 2026, 08:28 PM
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सीएम अधिराज ने पश्चिम बंगाल के स्कूलों में मोबाइल उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की, गुजरात के मॉडल को उदाहरण के तौर पर बताया।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री अधिराज ने राज्य के सभी स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम छात्रों के पढ़ाई में ध्यान भटकने और शैक्षणिक परिणामों पर असर को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अपनी घोषणा में उन्होंने गुजरात सरकार की समान नीति का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने कक्षा में एकाग्रता बनाए रखने के सफल उदाहरण के रूप में बताया। अधिराज ने कहा कि गुजरात मॉडल को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।
मुख्य मंत्री ने बताया कि इस प्रस्ताव पर राज्य शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन के साथ चर्चा की जाएगी, और किसी भी औपचारिक नियम को लागू करने से पहले विस्तृत परामर्श किया जाएगा। इस समय कोई निश्चित समयसीमा या प्रवर्तन विधि घोषित नहीं की गई है।
शिक्षक संघों और अभिभावक समूहों से इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया की उम्मीद है, जो यह तय करेंगे कि पूरे राज्य में फोन प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक है या नहीं। सरकार ने कहा कि अंतिम नीति तैयार करने से पहले सभी पक्षों की राय ली जाएगी।
यदि यह नीति लागू होती है, तो यह सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों पर लागू होगी, जिससे पश्चिम बंगाल की नीति गुजरात के समान हो जाएगी।
अपनी घोषणा में उन्होंने गुजरात सरकार की समान नीति का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने कक्षा में एकाग्रता बनाए रखने के सफल उदाहरण के रूप में बताया। अधिराज ने कहा कि गुजरात मॉडल को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।
मुख्य मंत्री ने बताया कि इस प्रस्ताव पर राज्य शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन के साथ चर्चा की जाएगी, और किसी भी औपचारिक नियम को लागू करने से पहले विस्तृत परामर्श किया जाएगा। इस समय कोई निश्चित समयसीमा या प्रवर्तन विधि घोषित नहीं की गई है।
शिक्षक संघों और अभिभावक समूहों से इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया की उम्मीद है, जो यह तय करेंगे कि पूरे राज्य में फोन प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक है या नहीं। सरकार ने कहा कि अंतिम नीति तैयार करने से पहले सभी पक्षों की राय ली जाएगी।
यदि यह नीति लागू होती है, तो यह सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों पर लागू होगी, जिससे पश्चिम बंगाल की नीति गुजरात के समान हो जाएगी।