📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep
राजनीति
पश्चिम बंगाल बाय‑इलेक्शन में तृणमूल कांग्रेस के प्रतीक पर प्रतिद्वंद्वी समूहों का दावा
✍️ The Hindu
🗓 11 सित. 2026, 05:03 AM
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पश्चिम बंगाल में आगामी बाय‑इलेक्शन तृणमूल कांग्रेस के प्रतीक को लेकर प्रतिद्वंद्वी समूहों के दावों की कसौटी बनेगा, क्योंकि चुनाव आयोग उनके आवेदन पर विचार कर रहा है।
भारत चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में कई खाली सीटों के लिए बाय‑इलेक्शन की घोषणा की है, जो 2024 की शुरुआत में आयोजित होंगे। इन निर्वाचन क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का प्रतीक – फूल और घास – प्रमुख मुद्दा बन गया है, क्योंकि पार्टी के भीतर विभिन्न समूह अलग‑अलग आवेदन जमा कर रहे हैं। आयोग ने दावों की अंतिम तिथि निर्धारित की है और यह तय करेगा कि कौन‑सा समूह आगामी चुनावों में यह प्रतीक इस्तेमाल कर सकेगा।
पार्टी के अंदरूनी लोगों का कहना है कि इस निर्णय से टीएमसी की आंतरिक शक्ति संरचना पर बड़ा असर पड़ेगा, क्योंकि यह प्रतीक मतदाताओं के बीच ब्रांड मूल्य रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिद्वंद्वी समूह को प्रतीक मिल जाता है तो मौजूदा नेतृत्व की चुनावी ताकत कमजोर हो सकती है, जबकि incumbent को मिलने पर उसकी स्थिति मजबूत होगी।
बाय‑इलेक्शन को राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा भी बारीकी से देखा जा रहा है, क्योंकि यह दर्शाएगा कि टीएमसी की जमीनी समर्थन कितनी विभाजित है और प्रतीक विवाद व्यापक चुनावी परिदृश्य को कैसे प्रभावित कर सकता है।
पार्टी के अंदरूनी लोगों का कहना है कि इस निर्णय से टीएमसी की आंतरिक शक्ति संरचना पर बड़ा असर पड़ेगा, क्योंकि यह प्रतीक मतदाताओं के बीच ब्रांड मूल्य रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिद्वंद्वी समूह को प्रतीक मिल जाता है तो मौजूदा नेतृत्व की चुनावी ताकत कमजोर हो सकती है, जबकि incumbent को मिलने पर उसकी स्थिति मजबूत होगी।
बाय‑इलेक्शन को राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा भी बारीकी से देखा जा रहा है, क्योंकि यह दर्शाएगा कि टीएमसी की जमीनी समर्थन कितनी विभाजित है और प्रतीक विवाद व्यापक चुनावी परिदृश्य को कैसे प्रभावित कर सकता है।