📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / AjayDas
धर्म
विश्वकर्मा पूजा में भागलपुर का जुड़ाव: बाला लखेंद्र के लोहे के घर की कथा
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 17 सित. 2026, 06:36 PM
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बिहार में वार्षिक विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शिल्प कौशल का जश्न है, जिसमें भागलपुर के बाला लखेंद्र के लोहे के घर की पौराणिक कथा का विशेष जुड़ाव है।
विश्वकर्मा पूजा, जो बिहार में हर वर्ष मनाई जाती है, दिव्य वास्तुकार विश्वकर्मा को सम्मानित करती है और शिल्पकारों व निर्माण कार्यकर्ताओं के कौशल का जश्न मनाती है।
यह त्योहार एक प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जिसमें समुदाय एकत्र होकर प्रार्थना करते हैं, घरों को सजाते हैं और धातुकला तथा शिल्पकला का प्रदर्शन करते हैं।
भागलपुर जिले में, यह पूजा बाला लखेंद्र के लोहे के घर, जिसे "लोहे का घर" या "लोहारग" कहा जाता है, की प्राचीन लोककथा से गहराई से जुड़ी हुई है।
उत्सव के दौरान, भागलपुर के निवासी बाला लखेंद्र और लोहे के घर को समर्पित विशेष अनुष्ठान करते हैं, जो दृढ़ता और पारंपरिक शिल्पकला की स्थायी विरासत को उजागर करते हैं।
यह त्योहार एक प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जिसमें समुदाय एकत्र होकर प्रार्थना करते हैं, घरों को सजाते हैं और धातुकला तथा शिल्पकला का प्रदर्शन करते हैं।
भागलपुर जिले में, यह पूजा बाला लखेंद्र के लोहे के घर, जिसे "लोहे का घर" या "लोहारग" कहा जाता है, की प्राचीन लोककथा से गहराई से जुड़ी हुई है।
उत्सव के दौरान, भागलपुर के निवासी बाला लखेंद्र और लोहे के घर को समर्पित विशेष अनुष्ठान करते हैं, जो दृढ़ता और पारंपरिक शिल्पकला की स्थायी विरासत को उजागर करते हैं।