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राजनीति
VCK प्रमुख ने DMK पर गठबंधन नहीं बचाने का आरोप, पार्टी ने छोड़ा सहयोग
✍️ India Today
🗓 12 सित. 2026, 04:37 AM
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VCK नेता थिरुमवलवन ने कहा कि DMK ने गठबंधन में पार्टी को बनाए रखने का कोई प्रयास नहीं किया, जिससे VCK ने गठबंधन से बाहर निकल गया।
विधुतलाई चिरुथैगल कच्छी (VCK) ने तमिलनाडु में DMK‑नेतृत्व वाली गठबंधन से बाहर निकलने की घोषणा की, क्योंकि डॉ. मुनेत्रा कजहगम (DMK) ने पार्टी को गठबंधन में बनाए रखने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। यह कदम आगामी राज्य चुनावों से पहले आया, जब गठबंधन ने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ एकजुट मोर्चा पेश किया था।
VCK प्रमुख थिरुमवलवन ने पत्रकारों से कहा कि DMK ने VCK की चिंताओं को दूर करने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव या संवाद नहीं किया, और कहा कि "हमें बनाए रखने का कोई प्रयास नहीं किया गया"। उन्होंने कहा कि यह कदम VCK की राजनीतिक स्वायत्तता और अपने मूल मतदाता आधार की सुरक्षा के लिए आवश्यक था।
DMK ने इस आरोप पर अभी तक आधिकारिक जवाब नहीं दिया, पर वरिष्ठ पार्टी सदस्यों को रिपोर्टों के अनुसार अन्य क्षेत्रीय साझेदारों के साथ चर्चा में देखा गया है, ताकि VCK के स्थान को भर सकें। विश्लेषकों का मानना है कि VCK के बाहर निकलने से चुनावी परिदृश्य में बदलाव आ सकता है, विशेषकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहाँ पार्टी का समर्थन मजबूत है।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह विभाजन गठबंधन के भीतर बढ़ती तनाव को दर्शाता है, क्योंकि छोटे दल सीट‑साझा करने की बातचीत में अधिक प्रभाव चाहते हैं। इस पुनर्संरचना से DMK और VCK दोनों को चुनाव से पहले अपनी अभियान रणनीतियों को पुनः समायोजित करना पड़ सकता है।
VCK प्रमुख थिरुमवलवन ने पत्रकारों से कहा कि DMK ने VCK की चिंताओं को दूर करने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव या संवाद नहीं किया, और कहा कि "हमें बनाए रखने का कोई प्रयास नहीं किया गया"। उन्होंने कहा कि यह कदम VCK की राजनीतिक स्वायत्तता और अपने मूल मतदाता आधार की सुरक्षा के लिए आवश्यक था।
DMK ने इस आरोप पर अभी तक आधिकारिक जवाब नहीं दिया, पर वरिष्ठ पार्टी सदस्यों को रिपोर्टों के अनुसार अन्य क्षेत्रीय साझेदारों के साथ चर्चा में देखा गया है, ताकि VCK के स्थान को भर सकें। विश्लेषकों का मानना है कि VCK के बाहर निकलने से चुनावी परिदृश्य में बदलाव आ सकता है, विशेषकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहाँ पार्टी का समर्थन मजबूत है।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह विभाजन गठबंधन के भीतर बढ़ती तनाव को दर्शाता है, क्योंकि छोटे दल सीट‑साझा करने की बातचीत में अधिक प्रभाव चाहते हैं। इस पुनर्संरचना से DMK और VCK दोनों को चुनाव से पहले अपनी अभियान रणनीतियों को पुनः समायोजित करना पड़ सकता है।