सरकारी योजना
विदिशा के जैन दंपति के लिए शासन की योजनाएं बनीं जीवन की हमसफर
गंजबासौदा निवासी 68 वर्षीय उदयचंद जैन और उनकी पत्नी अंगूरीबाई जैन को वयोश्री-एडिप योजना के तहत कान की मशीन और छड़ी प्रदान की गई है, जिससे अब वे सुनने और चलने-फिरने में आसानी महसूस कर रहे हैं।
विदिशा जिले के गंजबासौदा निवासी जैन दंपति के लिए शासन की योजनाएं अब जीवन में सुविधा और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गई हैं। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित वयोश्री-एडिप योजना के तहत उन्हें मिले सहायक उपकरण और वृद्धावस्था पेंशन अब उनके दैनिक जीवन में सहारा बने हैं। वार्ड क्रमांक 11 निवासी 68 वर्षीय श्री उदयचंद जैन और उनकी 65 वर्षीय पत्नी श्रीमती अंगूरीबाई जैन वृद्धावस्था में सुनने और चलने-फिरने की समस्या का सामना कर रहे थे, जिसे अब शासन की सहायता से दूर किया गया है।
वयोश्री-एडिप योजना के तहत दोनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कान की मशीन और छड़ी उपलब्ध कराई गई है। कान की मशीन की मदद से अब पति-पत्नी एक-दूसरे की बातें अधिक आसानी से सुन पा रहे हैं, जिससे उनके बीच संवाद में सहजता लौट आई है। इसी तरह, छड़ी के सहारे दोनों एक साथ आने-जाने में सुविधा महसूस कर रहे हैं। ये उपकरण उनके लिए केवल सहायक साधन नहीं, बल्कि एक-दूसरे का साथ निभाते हुए सहज जीवन जीने का माध्यम बन गए हैं।
आर्थिक संकट से निपटने के लिए इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत दोनों को 600-600 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्राप्त हो रही है। यह नियमित राशि उनकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। इस प्रकार, पेंशन से आर्थिक सुरक्षा, कान की मशीन से संवाद में सुविधा और छड़ी से आवागमन में सहारा मिलने से जैन दंपति का जीवन आसान हो गया है।
उपकरणों की वितरण प्रक्रिया 22 जून को आयोजित सहायक उपकरण चिन्हांकन शिविर में शुरू हुई, जहां दोनों का परीक्षण किया गया। इसके बाद 8 अक्टूबर को निकाय स्तर पर आयोजित दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर में उन्हें चिन्हांकित उपकरण प्रदान किए गए। जैन दंपति शासन की योजनाओं से प्रसन्न हैं और बताते हैं कि अब वे उम्र की चुनौतियों के बीच एक-दूसरे का हाथ थामकर अधिक सहजता से अपना जीवन आगे बढ़ा रहे हैं।
वयोश्री-एडिप योजना के तहत दोनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार कान की मशीन और छड़ी उपलब्ध कराई गई है। कान की मशीन की मदद से अब पति-पत्नी एक-दूसरे की बातें अधिक आसानी से सुन पा रहे हैं, जिससे उनके बीच संवाद में सहजता लौट आई है। इसी तरह, छड़ी के सहारे दोनों एक साथ आने-जाने में सुविधा महसूस कर रहे हैं। ये उपकरण उनके लिए केवल सहायक साधन नहीं, बल्कि एक-दूसरे का साथ निभाते हुए सहज जीवन जीने का माध्यम बन गए हैं।
आर्थिक संकट से निपटने के लिए इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत दोनों को 600-600 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्राप्त हो रही है। यह नियमित राशि उनकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। इस प्रकार, पेंशन से आर्थिक सुरक्षा, कान की मशीन से संवाद में सुविधा और छड़ी से आवागमन में सहारा मिलने से जैन दंपति का जीवन आसान हो गया है।
उपकरणों की वितरण प्रक्रिया 22 जून को आयोजित सहायक उपकरण चिन्हांकन शिविर में शुरू हुई, जहां दोनों का परीक्षण किया गया। इसके बाद 8 अक्टूबर को निकाय स्तर पर आयोजित दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर में उन्हें चिन्हांकित उपकरण प्रदान किए गए। जैन दंपति शासन की योजनाओं से प्रसन्न हैं और बताते हैं कि अब वे उम्र की चुनौतियों के बीच एक-दूसरे का हाथ थामकर अधिक सहजता से अपना जीवन आगे बढ़ा रहे हैं।