🔥 TRENDING હવામાન પલટા કારણે શેરડી ઉત્પાદન ઘટ્યો,... कलेक्टर ने हैण्डलूम पार्क चन्देरी में... સુરતના માંડવી તાલુકાના અરેઠ ગામમાં ખોટ... उज्जैन में सड़क दुर्घटना सहायता हेतु ज... કડોદરા GIDC પોલીસે દિવાળીમાં સુરક્ષા મ... शिवपुरी पुलिस ने शहीदों को श्रद्धांजलि...
22 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
Local

वाराणसी में भरत मिलाप की लीला: 484‑साल पुरानी परंपरा और काशी नरेश की प्रमुख भूमिका

✍️ Reporter: Kailash Chandra Gupta 🗓 22 Oct 2026, 10:45 PM 👁 13
Watch on: 📘 Facebook
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

वाराणसी के मैदान में 4:40 बजे शाम को राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के मिलन की भावुक लीला ने लाखों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि काशी नरेश ने अपनी राजसी भूमिका निभाई।

वाराणसी के मैदान में 4:40 बजे शाम को राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के मिलन की भावुक लीला ने लाखों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि काशी नरेश ने अपनी राजसी भूमिका निभाई।

यह लीला लगभग 484 वर्ष पहले संत मेधा भगत द्वारा आरम्भ की गई थी, जिनके अनुसार स्वप्न में भगवान राम ने उन्हें काशी में भरत मिलाप कराने का आशीर्वाद दिया था।

काशी नरेश, जिन्हें काशी में भगवान शिव के प्रतिनिधि माना जाता है, इस आयोजन के प्रत्यक्षदर्शी बनते हैं। 228 वर्ष पुरानी परंपरा के अनुसार, 1796 में काशी नरेश महाराज उदित नारायण सिंह ने पहली बार भाग लिया था और तब से पाँच पीढ़ियाँ इस कार्यक्रम में शामिल होती आ रही हैं। आयोजन के बाद वे राजसी आरती करते हैं और स्वरूपों को स्वर्ण मुद्रा प्रदान करते हैं।

इस दौरान भगवान राम-लक्ष्मण के पाँच टन वजनी विशाल पुष्पक विमान को यादव समुदाय के लोगों ने परंपरागत वेश में कंधों पर उठाकर नाटी इमली भरत मिलाप मैदान से बड़ा गणेश स्तिथि अयोध्या महल तक पहुँचाया।
📲Get App