📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harshit.S.R
अपराध
उत्तराखंड हाईकोर्ट: पति की उम्र कपल को पुलिस सुरक्षा मिलने में बाधा नहीं
✍️ The Times of India
🗓 03 जुल. 2026, 07:32 PM
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पति की उम्र किसी जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करने का कारण नहीं बन सकती। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी सुरक्षा एक मौलिक अधिकार है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि पति की उम्र किसी जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने से मना करने का आधार नहीं हो सकती। बेंच ने स्पष्ट किया कि जब किसी विवाहित जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने पर विचार किया जा रहा हो, तो पति की उम्र अप्रासंगिक है।
अदालत का यह निर्णय इस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा सुरक्षा एक मौलिक अधिकार है। ऐसा प्रतीत होता है कि हाईकोर्ट एक ऐसी स्थिति को संबोधित कर रहा था जहां एक जोड़े ने सुरक्षा मांगी थी, और पति की उम्र इसे देने के खिलाफ एक कारक के रूप में मानी जा सकती थी।
इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जोड़े, पति की उम्र के बावजूद, जब वे खतरों का सामना करते हैं या सहायता की आवश्यकता होती है, तो आवश्यक सुरक्षा उपायों तक पहुंच सकें, जिससे उनकी सुरक्षा और शांति के अधिकार को बल मिले।
अदालत का यह निर्णय इस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा सुरक्षा एक मौलिक अधिकार है। ऐसा प्रतीत होता है कि हाईकोर्ट एक ऐसी स्थिति को संबोधित कर रहा था जहां एक जोड़े ने सुरक्षा मांगी थी, और पति की उम्र इसे देने के खिलाफ एक कारक के रूप में मानी जा सकती थी।
इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जोड़े, पति की उम्र के बावजूद, जब वे खतरों का सामना करते हैं या सहायता की आवश्यकता होती है, तो आवश्यक सुरक्षा उपायों तक पहुंच सकें, जिससे उनकी सुरक्षा और शांति के अधिकार को बल मिले।