📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Health and Family Welfare
राजनीति
उत्तarakhand के मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को शिकायतों का वास्तविक समाधान करने का निर्देश दिया
✍️ timesofindia.indiatimes.com
🗓 15 सित. 2026, 05:01 AM
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिकायतों को सिर्फ बंद कर देना पर्याप्त नहीं, अधिकारियों को उनका वास्तविक समाधान करना चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिकायतों को केवल कागज़ी तौर पर बंद करना पर्याप्त नहीं है; इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने उन मामलों का हवाला दिया जहाँ नागरिकों ने बताया कि उनकी शिकायतें बंद दर्ज हो गईं, पर समस्या बनी रही।
धामी ने विभाग प्रमुखों को परिणाम‑उन्मुख कार्यप्रणाली अपनाने का निर्देश दिया, जिसमें नियमित फील्ड जांच और फॉलो‑अप विज़िट शामिल हों, ताकि सुधारात्मक कदम लागू हों। उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिकारी बार‑बार बिना ठोस परिणाम के बंद रिपोर्ट देंगे, उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश राज्य सरकार की पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की व्यापक पहल के साथ मेल खाता है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में सेवा वितरण को बेहतर बनाना है। अधिकारियों को दो हफ्तों के भीतर एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा गया, जिसमें शिकायत समाधान की निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया बताई जाए।
स्थानीय NGOs सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया, यह मानते हुए कि इससे उत्तराखंड की प्रशासनिक प्रणाली में लंबे समय से जमा अनसुलझी शिकायतों की संख्या घटेगी।
धामी ने विभाग प्रमुखों को परिणाम‑उन्मुख कार्यप्रणाली अपनाने का निर्देश दिया, जिसमें नियमित फील्ड जांच और फॉलो‑अप विज़िट शामिल हों, ताकि सुधारात्मक कदम लागू हों। उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिकारी बार‑बार बिना ठोस परिणाम के बंद रिपोर्ट देंगे, उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश राज्य सरकार की पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की व्यापक पहल के साथ मेल खाता है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में सेवा वितरण को बेहतर बनाना है। अधिकारियों को दो हफ्तों के भीतर एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा गया, जिसमें शिकायत समाधान की निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया बताई जाए।
स्थानीय NGOs सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया, यह मानते हुए कि इससे उत्तराखंड की प्रशासनिक प्रणाली में लंबे समय से जमा अनसुलझी शिकायतों की संख्या घटेगी।