📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Sachinghai09
Derivative work: Radomian
देश
उत्तर प्रदेश में फास्ट‑ट्रैक कोर्ट के 78% लटके केस, RTI से पता चला
✍️ Mid-Day
🗓 26 अग. 2026, 08:18 PM
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मिड‑डे द्वारा दायर RTI से पता चला कि उत्तर प्रदेश में फास्ट‑ट्रैक कोर्ट के 78% लटके केस हैं, जिससे क्षेत्रीय असमानता स्पष्ट हुई।
मिड‑डे द्वारा दायर एक RTI अनुरोध से पता चला है कि उत्तर प्रदेश में फास्ट‑ट्रैक कोर्ट में लटके सभी मामलों में 78 प्रतिशत का हिस्सा है। कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी डेटा दर्शाता है कि राज्य के न्यायिक प्रणाली पर असमान रूप से अधिक बोझ है।
फास्ट‑ट्रैक कोर्टों की स्थापना आपराधिक और दीवानी मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए की गई थी, जिससे भारतीय अदालतों में व्याप्त बैकलॉग कम हो सके। राष्ट्रीय औसत अभी भी उच्च है, पर उत्तर प्रदेश का हिस्सा किसी भी अन्य राज्य से काफी अधिक है, जैसा कि RTI के जवाब में दिखाया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा अपर्याप्त स्टाफिंग, सीमित बुनियादी ढाँचा और फाइलिंग में वृद्धि जैसी प्रणालीगत समस्याओं को उजागर करता है। वे राज्य और केंद्र दोनों से अधिक संसाधन आवंटित करने और केस प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने का आग्रह करते हैं, ताकि इस राज्य में लंबित मामलों को कम किया जा सके।
वर्तमान में मंत्रालय ने कुल लंबित मामलों की संख्या नहीं बताई है, पर यह अनुपात उत्तर प्रदेश जैसे जनसंख्या‑घनिष्ठ राज्य में न्यायालयों के बोझ को कम करने हेतु नीति‑निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
फास्ट‑ट्रैक कोर्टों की स्थापना आपराधिक और दीवानी मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए की गई थी, जिससे भारतीय अदालतों में व्याप्त बैकलॉग कम हो सके। राष्ट्रीय औसत अभी भी उच्च है, पर उत्तर प्रदेश का हिस्सा किसी भी अन्य राज्य से काफी अधिक है, जैसा कि RTI के जवाब में दिखाया गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा अपर्याप्त स्टाफिंग, सीमित बुनियादी ढाँचा और फाइलिंग में वृद्धि जैसी प्रणालीगत समस्याओं को उजागर करता है। वे राज्य और केंद्र दोनों से अधिक संसाधन आवंटित करने और केस प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने का आग्रह करते हैं, ताकि इस राज्य में लंबित मामलों को कम किया जा सके।
वर्तमान में मंत्रालय ने कुल लंबित मामलों की संख्या नहीं बताई है, पर यह अनुपात उत्तर प्रदेश जैसे जनसंख्या‑घनिष्ठ राज्य में न्यायालयों के बोझ को कम करने हेतु नीति‑निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर सकता है।