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UPI नियमों के बदलाव से व्यापारियों में उठी चिंता, QR स्कैनर हटाने की लहर
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नए UPI नियमों और संभावित MDR शुल्क को लेकर कई व्यापारियों ने एहतियात के तौर पर अपने दुकानों से QR स्कैनर हटाना शुरू कर दिया है, जबकि ग्राहक पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है।
UPI भुगतान से जुड़े नए नियमों और संभावित MDR (Merchant Discount Rate) चार्ज को लेकर कई व्यापारियों में स्पष्ट चिंता देखी जा रही है। इन नियमों के लागू होने से व्यापारी और भुगतान प्रणाली के बीच लगने वाले शुल्क में वृद्धि की संभावना है, जिससे छोटे एवं मध्यम आकार के व्यवसायियों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
इस चिंता के चलते कुछ दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर अपने स्टोरों से UPI QR कोड स्कैनर हटाना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि यह कदम संभावित शुल्क वृद्धि से बचाव के लिए उठाया गया है, जबकि वे अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि नई शर्तें कब प्रभावी होंगी।
हालांकि, उपभोक्ताओं को UPI भुगतान पर कोई नया टैक्स या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि नई शर्तें केवल व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच के लेन‑देनों पर लागू होंगी, न कि अंतिम ग्राहक पर।
व्यापारियों की इस प्रतिक्रिया को देखते हुए, उद्योग विशेषज्ञों ने कहा है कि स्पष्ट दिशा‑निर्देश और समय‑सीमा के बिना ऐसे बदलाव से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। वे नियामकों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे नई नियमावली को शीघ्रता से सार्वजनिक करें और संभावित शुल्क संरचना को पारदर्शी बनाएं।
इस चिंता के चलते कुछ दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर अपने स्टोरों से UPI QR कोड स्कैनर हटाना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि यह कदम संभावित शुल्क वृद्धि से बचाव के लिए उठाया गया है, जबकि वे अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि नई शर्तें कब प्रभावी होंगी।
हालांकि, उपभोक्ताओं को UPI भुगतान पर कोई नया टैक्स या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि नई शर्तें केवल व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच के लेन‑देनों पर लागू होंगी, न कि अंतिम ग्राहक पर।
व्यापारियों की इस प्रतिक्रिया को देखते हुए, उद्योग विशेषज्ञों ने कहा है कि स्पष्ट दिशा‑निर्देश और समय‑सीमा के बिना ऐसे बदलाव से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। वे नियामकों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे नई नियमावली को शीघ्रता से सार्वजनिक करें और संभावित शुल्क संरचना को पारदर्शी बनाएं।