📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Nikhil2789
यात्रा
यूनेस्को ने मध्यप्रदेश के चार धरोहर स्थल टेंटेटिव लिस्ट में जोड़े, कुल 19 हो गए
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 29 सित. 2026, 01:01 PM
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बाघ गुफा, गिन्नौरगढ़ किला, बटेश्वर‑पदावली‑ककरामठ समूह और उदयगिरि को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया, जिससे मध्यप्रदेश के कुल 19 स्थल हो गए।
यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र ने मध्यप्रदेश के चार अतिरिक्त स्थलों को अपनी टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करने की स्वीकृति दी है। नई प्रविष्टियों में बाघ गुफा, गिन्नौरगढ़ किला, बटेश्वर‑पदावली‑ककरामठ समूह और उदयगिरि शामिल हैं। इन जोड़ के साथ राज्य के कुल 19 स्थल अब विश्व धरोहर के संभावित उम्मीदवार बन गए हैं।
बाघ गुफा अपने पाँचवीं शताब्दी के बौद्ध चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि गिन्नौरगढ़ किला 13वीं शताब्दी का एक पहाड़ी किला है जो क्षेत्रीय किलेबंदी का उदाहरण है। बटेश्वर‑पदावली‑ककरामठ समूह शैव और जैन दोनों परम्पराओं को समेटे हुए धार्मिक परिसर है, और उदयगिरि, विंध्य पर्वत की चोटी पर स्थित, प्रारम्भिक मध्यकालीन किलाबंदी को दर्शाता है।
राज्य के अधिकारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह बताते हुए कि टेंटेटिव लिस्ट विश्व धरोहर के पूर्ण मान्यता के लिए पहला कदम है। उन्होंने कहा कि इस मान्यता से सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार सृजन होगा और संरक्षण के लिए निधि आकर्षित होगी। यूनेस्को ने स्पष्ट किया कि टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना स्वचालित रूप से विश्व धरोहर नहीं बनाता, परन्तु स्थलों के अंतरराष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है।
संस्कृति मंत्रालय ने स्थानीय प्राधिकरणों से प्रत्येक स्थल के लिए विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार करने का आग्रह किया है, जिसमें प्रामाणिकता, अखंडता और प्रबंधन योजना का विवरण हो। सफल नामांकन पर मध्यप्रदेश को घरेलू और विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या का लाभ मिल सकता है, जिससे भारत की विविध ऐतिहासिक धरोहर की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।
बाघ गुफा अपने पाँचवीं शताब्दी के बौद्ध चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि गिन्नौरगढ़ किला 13वीं शताब्दी का एक पहाड़ी किला है जो क्षेत्रीय किलेबंदी का उदाहरण है। बटेश्वर‑पदावली‑ककरामठ समूह शैव और जैन दोनों परम्पराओं को समेटे हुए धार्मिक परिसर है, और उदयगिरि, विंध्य पर्वत की चोटी पर स्थित, प्रारम्भिक मध्यकालीन किलाबंदी को दर्शाता है।
राज्य के अधिकारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह बताते हुए कि टेंटेटिव लिस्ट विश्व धरोहर के पूर्ण मान्यता के लिए पहला कदम है। उन्होंने कहा कि इस मान्यता से सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार सृजन होगा और संरक्षण के लिए निधि आकर्षित होगी। यूनेस्को ने स्पष्ट किया कि टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना स्वचालित रूप से विश्व धरोहर नहीं बनाता, परन्तु स्थलों के अंतरराष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है।
संस्कृति मंत्रालय ने स्थानीय प्राधिकरणों से प्रत्येक स्थल के लिए विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार करने का आग्रह किया है, जिसमें प्रामाणिकता, अखंडता और प्रबंधन योजना का विवरण हो। सफल नामांकन पर मध्यप्रदेश को घरेलू और विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या का लाभ मिल सकता है, जिससे भारत की विविध ऐतिहासिक धरोहर की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।