📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
शिक्षा
यूक्रेनी एमबीबीएस छात्र ने एमपी हाई कोर्ट में एनएमसी की 12‑महीने की इंटर्नशिप नियम को चुनौती दी
✍️ Live Law
🗓 20 सित. 2026, 03:32 PM
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यूक्रेनी मेडिकल ग्रेजुएट ने एमपी हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने भारत में 12‑महीने की इंटर्नशिप की अनिवार्यता को असंभव बताया है।
यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहे एक छात्र ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (एनएमसी) के उस नियम को चुनौती दी है, जिसके तहत भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट को भारत में बारह महीने की इंटर्नशिप पूरी करनी अनिवार्य है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भारत में एक साल की इंटर्नशिप करना आर्थिक और लॉजिस्टिक दोनों दृष्टि से असंभव है, विशेषकर यात्रा प्रतिबंधों और जीवनयापन की लागत को देखते हुए। उन्होंने अदालत से इस बात की समीक्षा करने को कहा कि क्या यह नियम भारतीय छात्रों के आजीविका अधिकार और समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप है।
छात्र के कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि कई विदेश‑विदेशी भारतीय मेडिकल छात्रों को विदेशी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है और अनिवार्य घरेलू इंटर्नशिप उनके पेशेवर प्रवेश में बाधा बनती है। हाई कोर्ट ने इस चुनौती की वैधता और संभावित अंतरिम राहत पर विचार करने के लिए सुनवाई निर्धारित की है।
यह मामला विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय मेडिकल छात्रों के बीच एनएमसी की नीतियों के प्रति बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है। कोर्ट का निर्णय समान परिस्थितियों में कई अन्य छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
अभी तक कोर्ट के किसी भी अंतरिम आदेश की जानकारी उपलब्ध नहीं है, और मामला न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भारत में एक साल की इंटर्नशिप करना आर्थिक और लॉजिस्टिक दोनों दृष्टि से असंभव है, विशेषकर यात्रा प्रतिबंधों और जीवनयापन की लागत को देखते हुए। उन्होंने अदालत से इस बात की समीक्षा करने को कहा कि क्या यह नियम भारतीय छात्रों के आजीविका अधिकार और समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप है।
छात्र के कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि कई विदेश‑विदेशी भारतीय मेडिकल छात्रों को विदेशी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है और अनिवार्य घरेलू इंटर्नशिप उनके पेशेवर प्रवेश में बाधा बनती है। हाई कोर्ट ने इस चुनौती की वैधता और संभावित अंतरिम राहत पर विचार करने के लिए सुनवाई निर्धारित की है।
यह मामला विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय मेडिकल छात्रों के बीच एनएमसी की नीतियों के प्रति बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है। कोर्ट का निर्णय समान परिस्थितियों में कई अन्य छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
अभी तक कोर्ट के किसी भी अंतरिम आदेश की जानकारी उपलब्ध नहीं है, और मामला न्यायिक समीक्षा के अधीन है।