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22 अक्टू. 2026•
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कृषि

उज्जैन में किसानों ने जीवामृत से पराली प्रबंधन की राह बनाई आसान, कलेक्टर ने की सराहना

✍️ रिपोर्टर: Pranav Gaur 🗓 22 अक्टू. 2026, 02:51 PM 👁 11
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उज्जैन के ग्राम करनावद में आयोजित मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के शिविर में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने किसानों द्वारा जीवामृत के उपयोग से पराली प्रबंधन और मिट्टी की सेहत सुधारने के नवाचार की सराहना की।

उज्जैन, 22 अक्टूबर 2026। कृषि विभाग उज्जैन के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से स्थानीय किसान कम लागत में 'जीवामृत' तैयार कर पराली प्रबंधन के क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं। प्राकृतिक जंगल की मिट्टी, गुड़ और पानी से निर्मित यह जीवामृत खेतों में जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने और फसल उत्पादन में सहायता देने का एक प्रभावी विकल्प बन रहा है।

मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के अंतर्गत ग्राम करनावद में आयोजित जिलास्तरीय शिविर में कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने किसानों के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने अन्य किसानों को भी प्रेरित करते हुए कहा कि वे भी जीवामृत का उपयोग करें और पराली को खेतों में ही गलाकर उसका बेहतर प्रबंधन करें।

कृषि विभाग के उपसंचालक ने बताया कि जीवामृत बनाने की प्रक्रिया सरल और किफायती है। एक बीघा भूमि के लिए लगभग 2 किलोग्राम प्राकृतिक जंगल की मिट्टी, 1 किलोग्राम गुड़ और 20 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जिसमें तैयार होने के लिए 15 से 20 दिन लगते हैं। इसका उपयोग मिट्टी में केंचुओं और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ाता है, जिससे पराली के अपघटन में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जीवामृत के नियमित उपयोग से मिट्टी की संरचना, उर्वरता और जलधारण क्षमता में सुधार होता है। बेहतर जलधारण क्षमता से सिंचाई की आवश्यकता कम होती है और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिलता है। इस नवाचार से किसानों को पराली जलाने की आवश्यकता कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का एक किफायती विकल्प उपलब्ध हो रहा है।
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