📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Metrobús / Gobierno de la Ciudad de México
स्थानीय
उदयपुर में पति नहीं दे सका पत्नी का अंतिम संस्कार, शव 7 दिन तक मुर्दाघर में
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 25 सित. 2026, 08:00 PM
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पत्नी की मौत के बाद आर्थिक तंगी से जूझते उदयपुर के एक बेघर पति ने 7 दिन तक शव को मुर्दाघर में रखा, तब पुलिस और एक सामाजिक संस्था ने मदद की।
उदयपुर, राजस्थान – आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक पति को पत्नी की मृत्यु के बाद तुरंत अंतिम संस्कार करवाने के लिए आवश्यक धन नहीं मिल सका। इसलिए उन्होंने मृत शरीर को एमबी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा, जहाँ वह सात दिन तक रहा।
परिवार द्वारा शव नहीं उठाने पर स्थानीय पुलिस को स्थिति का पता चला। पुलिस अधिकारियों ने एक सामाजिक संस्था के सहयोग से बकाया खर्चों को उठाया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सुगम बनाया।
इस मदद से परिवार ने हिन्दू रीति‑रिवाजों के अनुसार अन्तिम संस्कार कर सका, जिससे पति को एक हफ्ते की अनिश्चितता से राहत मिली। यह घटना राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में गरीबी के कारण अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच में आने वाली कठिनाइयों को उजागर करती है।
समाज कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ वित्तीय सहायता के अधिक सुलभ होने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं, विशेषकर उन परिवारों के लिए जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं।
पुलिस और सहयोगी संस्था ने सहायता की गई राशि को गोपनीय रखा है, क्योंकि परिवार की निजता को सम्मानित किया गया है।
परिवार द्वारा शव नहीं उठाने पर स्थानीय पुलिस को स्थिति का पता चला। पुलिस अधिकारियों ने एक सामाजिक संस्था के सहयोग से बकाया खर्चों को उठाया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सुगम बनाया।
इस मदद से परिवार ने हिन्दू रीति‑रिवाजों के अनुसार अन्तिम संस्कार कर सका, जिससे पति को एक हफ्ते की अनिश्चितता से राहत मिली। यह घटना राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में गरीबी के कारण अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच में आने वाली कठिनाइयों को उजागर करती है।
समाज कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ वित्तीय सहायता के अधिक सुलभ होने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं, विशेषकर उन परिवारों के लिए जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं।
पुलिस और सहयोगी संस्था ने सहायता की गई राशि को गोपनीय रखा है, क्योंकि परिवार की निजता को सम्मानित किया गया है।