📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Education
शिक्षा
त्रिपुरा मानवाधिकार आयोग ने अगरताल स्कूल में पीएम पोषण योजना की अनियमितताओं की रिपोर्ट मांगी
✍️ India Today NE
🗓 26 अग. 2026, 07:18 PM
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त्रिपुरा राज्य मानवाधिकार आयोग ने अगरताल के एक स्कूल में पीएम पोषण योजना की अनियमितताओं पर विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है।
त्रिपुरा राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) ने सोमवार को अगरताल के एक सरकारी स्कूल में प्रधानमंत्री पोषण अभियान के कार्यान्वयन में संभावित अनियमितताओं पर विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश जारी किया। आयोग ने कहा कि यह कदम बच्चों के अधिकारों की रक्षा और सार्वजनिक कल्याण योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के अपने दायरे में आता है।
एसएचआरसी के प्रारम्भिक अवलोकनों से पता चलता है कि पोषण किटों के वितरण में गड़बड़ी और योजना के लिए आवंटित निधियों के लेखा‑जांच में असमानताएँ हो सकती हैं। आयोग ने स्कूल प्रशासन, जिला शिक्षा कार्यालय और राज्य पोषण विभाग को दस दिनों के भीतर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
राज्य अधिकारियों ने आयोग के हस्तक्षेप को स्वीकार किया और सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि आंतरिक ऑडिट पहले ही चल रहा है और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। एसएचआरसी ने चेतावनी दी कि यदि मांगी गई जानकारी नहीं दी गई तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रधानमंत्री पोषण अभियान, 2018 में शुरू किया गया, का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण स्तर में सुधार करना है। जबकि इस योजना को उसकी पहुँच के लिए सराहा गया है, कार्यान्वयन में समय‑समय पर आई कमियों को लेकर मानवाधिकार आयोग जैसे निगरानी निकाय सतर्क रहकर जांच करते रहते हैं।
एसएचआरसी के प्रारम्भिक अवलोकनों से पता चलता है कि पोषण किटों के वितरण में गड़बड़ी और योजना के लिए आवंटित निधियों के लेखा‑जांच में असमानताएँ हो सकती हैं। आयोग ने स्कूल प्रशासन, जिला शिक्षा कार्यालय और राज्य पोषण विभाग को दस दिनों के भीतर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
राज्य अधिकारियों ने आयोग के हस्तक्षेप को स्वीकार किया और सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि आंतरिक ऑडिट पहले ही चल रहा है और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। एसएचआरसी ने चेतावनी दी कि यदि मांगी गई जानकारी नहीं दी गई तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रधानमंत्री पोषण अभियान, 2018 में शुरू किया गया, का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण स्तर में सुधार करना है। जबकि इस योजना को उसकी पहुँच के लिए सराहा गया है, कार्यान्वयन में समय‑समय पर आई कमियों को लेकर मानवाधिकार आयोग जैसे निगरानी निकाय सतर्क रहकर जांच करते रहते हैं।