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बिज़नेस
राजस्व अधिशेष के बावजूद त्रिपुरा को राजकोषीय घाटे का सामना: सीएजी रिपोर्ट
✍️ Enewstime
🗓 23 जून 2026, 07:33 AM
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2024-25 के लिए हालिया सीएजी रिपोर्ट में त्रिपुरा के मिश्रित वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है, जिसमें राजस्व अधिशेष के साथ-साथ बढ़ते राजकोषीय घाटे और सरकारी गारंटी को लेकर चिंताएं भी शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए त्रिपुरा के वित्त पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की नवीनतम रिपोर्ट राज्य के लिए एक मिश्रित आर्थिक तस्वीर प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने राजस्व अधिशेष प्राप्त करने और सार्वजनिक ऋण को कम स्तर पर बनाए रखने में सफलता हासिल की है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। सरकारी गारंटी की बढ़ती संख्या के साथ यह बढ़ता हुआ घाटा, त्रिपुरा की अर्थव्यवस्था की भविष्य की वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े करता है। सीएजी की रिपोर्ट इन उभरती चिंताओं को दूर करने के लिए सावधानीपूर्वक वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देती है।
राजस्व सृजन और नियंत्रित ऋण के सकारात्मक पहलुओं के बावजूद, सीएजी के निष्कर्ष निर्दिष्ट अवधि के दौरान त्रिपुरा के आर्थिक प्रबंधन के महत्वपूर्ण मूल्यांकन के रूप में कार्य करते हैं और राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता की आवश्यकता को इंगित करते हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। सरकारी गारंटी की बढ़ती संख्या के साथ यह बढ़ता हुआ घाटा, त्रिपुरा की अर्थव्यवस्था की भविष्य की वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े करता है। सीएजी की रिपोर्ट इन उभरती चिंताओं को दूर करने के लिए सावधानीपूर्वक वित्तीय प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देती है।
राजस्व सृजन और नियंत्रित ऋण के सकारात्मक पहलुओं के बावजूद, सीएजी के निष्कर्ष निर्दिष्ट अवधि के दौरान त्रिपुरा के आर्थिक प्रबंधन के महत्वपूर्ण मूल्यांकन के रूप में कार्य करते हैं और राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता की आवश्यकता को इंगित करते हैं।