📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
स्वास्थ्य
त्रिपुरा में पैराक्वेट विषाक्तता रोगी के लिए पहली ECMO प्रक्रिया
✍️ India Today NE
🗓 26 अग. 2026, 12:19 AM
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त्रिपुरा के डॉक्टरों ने पैराक्वेट विषाक्तता से ग्रस्त रोगी को बचाने के लिए राज्य में पहली बार ECMO प्रक्रिया सफलतापूर्वक की।
त्रिपुरा के चिकित्सकों ने राज्य में पहली बार एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनशन (ECMO) प्रक्रिया पूरी की, जिससे पैराक्वेट विषाक्तता से ग्रस्त रोगी को जीवनरक्षक सहायता मिली।
ECMO एक कृत्रिम फेफड़े की तरह काम करता है, जो रक्त को शरीर के बाहर ऑक्सीजन देता है और रोगी के फेफड़ों को ठीक होने का समय देता है। पैराक्वेट के कारण फेफड़ों को तीव्र क्षति होने पर सामान्य वेंटिलेशन अक्सर पर्याप्त नहीं रहता, इसलिए इस उन्नत तकनीक का सहारा लिया गया।
अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि इस सफलता से क्षेत्र में गंभीर विषाक्तता और श्वसन विफलता के मामलों में ECMO के उपयोग की संभावनाएँ बढ़ेंगी और यह राज्य की गंभीर देखभाल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ECMO एक कृत्रिम फेफड़े की तरह काम करता है, जो रक्त को शरीर के बाहर ऑक्सीजन देता है और रोगी के फेफड़ों को ठीक होने का समय देता है। पैराक्वेट के कारण फेफड़ों को तीव्र क्षति होने पर सामान्य वेंटिलेशन अक्सर पर्याप्त नहीं रहता, इसलिए इस उन्नत तकनीक का सहारा लिया गया।
अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि इस सफलता से क्षेत्र में गंभीर विषाक्तता और श्वसन विफलता के मामलों में ECMO के उपयोग की संभावनाएँ बढ़ेंगी और यह राज्य की गंभीर देखभाल क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कदम है।