📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Financial Times
स्वास्थ्य
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर CJP संस्थापक दीपके ने किया परिवारों से मिलना
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 12 सित. 2026, 09:32 PM
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CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने बालाघाट, एमपी में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाते हुए।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की एक श्रृंखला में मौतें हो गईं, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर जनता में गुस्सा बढ़ा है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस स्थिति को समझने के लिए बालाघाट का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में पेडियाट्रिक सुविधाओं की कमी, एम्बुलेंस की देर से पहुंच और आवश्यक दवाओं की अनुपलब्धता को प्रमुख समस्याओं के रूप में उजागर किया।
दीपके ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक लापरवाही जारी रहने पर बड़े पैमाने पर विरोध हो सकता है और तुरंत जांच की मांग की। उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग से मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात करने और दूरदराज़ आदिवासी बस्तियों तक आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
स्थानीय अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया, पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि मामलों की समीक्षा चल रही है। बैठक के अंत में समुदाय के नेताओं ने सुधारात्मक कदमों की निगरानी करने का संकल्प जताया।
यह घटना भारत के आदिवासी जनसंख्या को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में चल रही चुनौतियों को फिर से उजागर करती है, जिसे नीति निर्माताओं ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्टों में बार-बार बताया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस स्थिति को समझने के लिए बालाघाट का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में पेडियाट्रिक सुविधाओं की कमी, एम्बुलेंस की देर से पहुंच और आवश्यक दवाओं की अनुपलब्धता को प्रमुख समस्याओं के रूप में उजागर किया।
दीपके ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक लापरवाही जारी रहने पर बड़े पैमाने पर विरोध हो सकता है और तुरंत जांच की मांग की। उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग से मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात करने और दूरदराज़ आदिवासी बस्तियों तक आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
स्थानीय अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया, पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि मामलों की समीक्षा चल रही है। बैठक के अंत में समुदाय के नेताओं ने सुधारात्मक कदमों की निगरानी करने का संकल्प जताया।
यह घटना भारत के आदिवासी जनसंख्या को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में चल रही चुनौतियों को फिर से उजागर करती है, जिसे नीति निर्माताओं ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्टों में बार-बार बताया है।