📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bruno413
यात्रा
लाचेन‑लाचुंग में पर्यटन की बढ़ोतरी से तरल‑कचरे की समस्या
✍️ Sikkimexpress
🗓 24 अग. 2026, 09:48 AM
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लाचेन और लाचुंग में पर्यटकों की तेज़ी से बढ़ती संख्या ने स्थानीय जल‑निष्कासन प्रणाली को दबाव में डाल दिया है, जिससे पर्यावरणीय खतरे की चिंता बढ़ी है।
सिक्किम के उत्तर‑पूर्वी भाग में स्थित लाचेन और लाचुंग गांवों में इस मौसम में पर्यटकों की संख्या में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की गई है, जैसा कि स्थानीय प्राधिकरणों ने बताया। यह बढ़ोतरी आर्थिक रूप से लाभदायक है, परंतु इन दो बस्तियों की सीमित तरल‑कचरा निकासी प्रणाली पर दबाव बढ़ा है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सीवेज टैंक और निकासी नालें अपनी क्षमता से अधिक काम कर रही हैं, जिससे सार्वजनिक क्षेत्रों और पास के नदियों में कभी‑कभी जल‑अवरोधन हो रहा है। निवासियों और व्यापारियों ने इस बात पर चिंता जताई है कि बिना उपचारित अपशिष्ट जल उस स्वच्छ वातावरण को नुकसान पहुँचा सकता है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।
जिला प्रशासन ने अस्थायी कचरा संग्रह बिंदु स्थापित करने और सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने जैसी त्वरित उपायों पर विचार किया है, जबकि दीर्घकालिक योजना में राज्य एजेंसियों के सहयोग से सीवेज सुविधाओं को उन्नत करने की चर्चा चल रही है। अभी तक कोई निश्चित समय‑सीमा घोषित नहीं की गई है।
पर्यावरणीय NGOs ने पर्यटकों के लिए कड़े कचरा‑प्रबंधन दिशानिर्देशों की मांग की है, जिसमें निर्धारित सुविधाओं का उपयोग और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की गई है। यह स्थिति पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन के विकास और सतत बुनियादी ढाँचे के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करती है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सीवेज टैंक और निकासी नालें अपनी क्षमता से अधिक काम कर रही हैं, जिससे सार्वजनिक क्षेत्रों और पास के नदियों में कभी‑कभी जल‑अवरोधन हो रहा है। निवासियों और व्यापारियों ने इस बात पर चिंता जताई है कि बिना उपचारित अपशिष्ट जल उस स्वच्छ वातावरण को नुकसान पहुँचा सकता है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।
जिला प्रशासन ने अस्थायी कचरा संग्रह बिंदु स्थापित करने और सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने जैसी त्वरित उपायों पर विचार किया है, जबकि दीर्घकालिक योजना में राज्य एजेंसियों के सहयोग से सीवेज सुविधाओं को उन्नत करने की चर्चा चल रही है। अभी तक कोई निश्चित समय‑सीमा घोषित नहीं की गई है।
पर्यावरणीय NGOs ने पर्यटकों के लिए कड़े कचरा‑प्रबंधन दिशानिर्देशों की मांग की है, जिसमें निर्धारित सुविधाओं का उपयोग और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की गई है। यह स्थिति पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन के विकास और सतत बुनियादी ढाँचे के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करती है।