📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / எஸ். பி. கிருஷ்ணமூர்த்தி
धर्म
गयाजी में चौथे दिन ब्रह्मसरोवर में पितृपक्ष तर्पण के लिए उमड़ी भीड़
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 30 सित. 2026, 02:32 PM
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गयाजी के पितृपक्ष मेले के चौथे दिन, श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर में तर्पण, काकबलि और तारक ब्रह्म के अनुष्ठान किए।
गयाजी के पितृपक्ष मेले के चौथे दिन, ब्रह्मसरोवर के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। यहाँ तर्पण, काकबलि और तारक ब्रह्म के अनुष्ठान किए गए, जिससे पूर्वजों की शांति और मोक्ष की कामना की गई।
मेले के आयोजकों के अनुसार, बिहार और पड़ोसी राज्यों से आए परिवारों ने घाटों के पास अस्थायी शिविर लगाकर अनुष्ठान संपन्न किए। पुजारी शास्त्रीय मंत्रों के साथ पवित्र जल को सरोवर में डालते रहे, जिससे आत्माओं को मुक्ति की दिशा में अग्रसर माना जाता है।
पितृपक्ष के इस पावन समय में यह आयोजन मुख्य आकर्षण है। स्थानीय प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की, जिससे अनुष्ठान सुगमता से सम्पन्न हो सके।
गया की तीर्थस्थलीय महत्ता को यह भीड़ और स्पष्ट करती है, विशेषकर इस पवित्र अवधि में। ब्रह्मसरोवर, जो पूर्वजों के तर्पण का प्रमुख स्थल है, हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपने आध्यात्मिक कर्तव्यों को पूरा करने के लिए आकर्षित करता है।
अनुष्ठान समाप्त होने के बाद, सहभागी अपने पूर्वजों के लिए इस पवित्र स्थान पर किए गए तर्पण को सफल मानते हुए धन्यवाद व्यक्त कर रहे थे, और आशा जताते हैं कि उनका यह कर्म शांति और मोक्ष लाएगा।
मेले के आयोजकों के अनुसार, बिहार और पड़ोसी राज्यों से आए परिवारों ने घाटों के पास अस्थायी शिविर लगाकर अनुष्ठान संपन्न किए। पुजारी शास्त्रीय मंत्रों के साथ पवित्र जल को सरोवर में डालते रहे, जिससे आत्माओं को मुक्ति की दिशा में अग्रसर माना जाता है।
पितृपक्ष के इस पावन समय में यह आयोजन मुख्य आकर्षण है। स्थानीय प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की, जिससे अनुष्ठान सुगमता से सम्पन्न हो सके।
गया की तीर्थस्थलीय महत्ता को यह भीड़ और स्पष्ट करती है, विशेषकर इस पवित्र अवधि में। ब्रह्मसरोवर, जो पूर्वजों के तर्पण का प्रमुख स्थल है, हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपने आध्यात्मिक कर्तव्यों को पूरा करने के लिए आकर्षित करता है।
अनुष्ठान समाप्त होने के बाद, सहभागी अपने पूर्वजों के लिए इस पवित्र स्थान पर किए गए तर्पण को सफल मानते हुए धन्यवाद व्यक्त कर रहे थे, और आशा जताते हैं कि उनका यह कर्म शांति और मोक्ष लाएगा।