दीपावली तक अमेठी को मिलेगी साइबर सुरक्षा की नई सौगात, 3.69 करोड़ से बन रहा अत्याधुनिक साइबर क्राइम थाना।
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90 फीसदी से अधिक निर्माण पूरा, डिजिटल फोरेंसिक लैब में मोबाइल-लैपटॉप और डिलीट डेटा की होगी जांच।
नीड 24 न्यूज संवाददाता, गौरीगंज (अमेठी)। अमेठी में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए अत्याधुनिक साइबर क्राइम थाना तैयार किया जा रहा है। गौरीगंज थाना क्षेत्र के सैंठा रोड स्थित बाहापुर ग्राम पंचायत में 0.285 हेक्टेयर भूमि पर बन रहे प्रशासनिक भवन का 90 फीसदी से अधिक निर्माण पूरा हो चुका है। 3.69 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को दीपावली तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गृह एवं गोपनीय विभाग से वित्त पोषित इस परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की निर्माण इकाई अयोध्या करा रही है। भवन तैयार होने के बाद साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत, तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण और विवेचना के लिए एक ही परिसर में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
डिजिटल फोरेंसिक लैब होगी सबसे अहम सुविधा
नए भवन में साइबर लैब और डिजिटल फोरेंसिक कक्ष बनाया जा रहा है। यहां मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों से जुड़े साक्ष्यों की तकनीकी जांच की जा सकेगी। डिलीट डेटा रिकवर करने और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े मामलों की पड़ताल में भी यह सुविधा मददगार होगी।
पीड़ितों के लिए शिकायत एवं सहायता कक्ष
साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराध के पीड़ितों के लिए अलग शिकायत एवं सहायता कक्ष बनाया जा रहा है। यहां शिकायत दर्ज कराने के साथ 1930 हेल्पलाइन और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल से संबंधित प्रक्रिया में सहायता मिल सकेगी। साइबर ठगी के मामलों में तत्काल शिकायत और बैंकिंग संस्थानों से समन्वय को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सर्वर रूम से मालखाने तक आधुनिक व्यवस्था
भवन में सर्वर एवं डेटा रूम, अधिकारियों और विवेचकों के लिए अलग कक्ष, सम्मेलन कक्ष और पूछताछ कक्ष भी बनाए जा रहे हैं। साइबर अपराध में जब्त मोबाइल, लैपटॉप, सिम कार्ड, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए रिकॉर्ड रूम और मालखाने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा लॉकअप, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
निर्माण इकाई अयोध्या के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि भवन का 90 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य तेजी से कराया जा रहा है और दीपावली तक निर्माण पूरा करने का प्रयास है।
जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने बताया कि परियोजना अंतिम चरण में है। भवन पूरा होने के बाद जिले में साइबर अपराध की शिकायत से लेकर डिजिटल साक्ष्यों की जांच और विवेचना तक के लिए आधुनिक आधारभूत ढांचा उपलब्ध होगा। इससे साइबर अपराध की जांच को अधिक तकनीकी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
गृह एवं गोपनीय विभाग से वित्त पोषित इस परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की निर्माण इकाई अयोध्या करा रही है। भवन तैयार होने के बाद साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत, तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण और विवेचना के लिए एक ही परिसर में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
डिजिटल फोरेंसिक लैब होगी सबसे अहम सुविधा
नए भवन में साइबर लैब और डिजिटल फोरेंसिक कक्ष बनाया जा रहा है। यहां मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों से जुड़े साक्ष्यों की तकनीकी जांच की जा सकेगी। डिलीट डेटा रिकवर करने और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े मामलों की पड़ताल में भी यह सुविधा मददगार होगी।
पीड़ितों के लिए शिकायत एवं सहायता कक्ष
साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराध के पीड़ितों के लिए अलग शिकायत एवं सहायता कक्ष बनाया जा रहा है। यहां शिकायत दर्ज कराने के साथ 1930 हेल्पलाइन और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल से संबंधित प्रक्रिया में सहायता मिल सकेगी। साइबर ठगी के मामलों में तत्काल शिकायत और बैंकिंग संस्थानों से समन्वय को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सर्वर रूम से मालखाने तक आधुनिक व्यवस्था
भवन में सर्वर एवं डेटा रूम, अधिकारियों और विवेचकों के लिए अलग कक्ष, सम्मेलन कक्ष और पूछताछ कक्ष भी बनाए जा रहे हैं। साइबर अपराध में जब्त मोबाइल, लैपटॉप, सिम कार्ड, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए रिकॉर्ड रूम और मालखाने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा लॉकअप, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
निर्माण इकाई अयोध्या के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि भवन का 90 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य तेजी से कराया जा रहा है और दीपावली तक निर्माण पूरा करने का प्रयास है।
जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने बताया कि परियोजना अंतिम चरण में है। भवन पूरा होने के बाद जिले में साइबर अपराध की शिकायत से लेकर डिजिटल साक्ष्यों की जांच और विवेचना तक के लिए आधुनिक आधारभूत ढांचा उपलब्ध होगा। इससे साइबर अपराध की जांच को अधिक तकनीकी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।